Class 12 Political Science भारत के विदेश संबंध Notes In Hindi

12 Class Political Science – II Chapter 4 भारत के विदेश संबंध Notes In Hindi

TextbookNCERT
ClassClass 12
SubjectPolitical Science 2nd book
ChapterChapter 4
Chapter Nameभारत के विदेश संबंध 
CategoryClass 12 Political Science
MediumHindi

Class 12 Political Science – II Chapter 4 भारत के विदेश संबंध Notes in Hindi इस अध्याय मे हम भारत के पड़ोसी देशों के साथ संबंध विदेश नीति के सिद्धान्त , भारत के दूसरे देशों के साथ बदलते संबंधः यूएस , रूस , चीन , इज़राइल , पाकिस्तान , बांग्लादेश , नेपाल , श्रीलंका , और म्यान्मार , भारत का परमाणु कार्यक्रम के बारे में विस्तार से जानेंगे ।

🍁 अध्याय = 4 🍁
🌺 भारत के विदेश संबंध 🌺

💠 विदेश नीति : –

🔹 जब एक देश विभिन्न देशों , अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों , अन्तर्राष्ट्रीय गतिविधियों तथा आन्दोलनों व अन्तर्राष्ट्रीय समस्याओं के प्रति जिन नीतियों को अपनाता है , उन नीतियों को सामूहिक रूप से विदेश नीति कहा जाता है । 

🔹 अर्थात प्रत्येक देश अन्य देशों के साथ संबंधों की स्थापना में एक विशेष प्रकार की ही नीति का प्रयोग करता है जिसे विदेश नीति कहते हैं ।

💠 भारत की विदेश निति : –

🔹 भारत बहुत चुनौतीपूर्ण अन्तर्राष्ट्रीय परिस्थितियों में आजाद हुआ था । उस समय लगभग संपूर्ण विश्व दो ध्रुवों मे बँट चुका था । ऐसे में भारत के प्रधानमंत्री श्री जवाहर लाल नेहरू ने बड़ी दूरदर्शिता के साथ भारत की विदेश नीति तय की । भारत की विदेश नीति पर देश के पहले प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री पं जवाहर लाल नेहरू की अमिट छाप है ।

💠 नेहरू जी की विदेश नीति के तीन मुख्य उद्देश्य थे : –

  • 1 ) कठिन संघर्ष से प्राप्त सम्प्रभुता को बचाए रखना ।
  • 2 ) क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखना ।
  • 3 ) तेज गति से आर्थिक विकास करना ।

💠 भारत की विदेश नीति के मुख्य सिद्धान्त : –

  • गुटनिरपेक्षता
  • वसुधैव कुटुम्बकम
  • अंतर्राष्ट्रीय मामलों में स्वतंत्रतापूर्वक एवं सक्रिय भागीदारी
  • पंचशील
  • साम्राज्यवाद का विरोध
  • अंतर्राष्ट्रीय विवादों का शांतिपूर्ण हल
  • निःशस्त्रीकरण

💠 शान्तिपूर्ण सह – अस्तित्व : –

🔹 शांतिपूर्ण सह – अस्तित्व भारतीय विदेश नीति की प्रमुख विशेषता है । शांतिपूर्ण सह अस्तित्व का अभिप्राय है कि अन्तर्राष्ट्रीय या राष्ट्रीय विवादों को आपसी बात – चीत के माध्यम से समाप्त करना । अपने समान दूसरे राष्ट्रों के अस्तित्व को महत्व देना । किसी भी देश को किसी अन्य देश के आन्तरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना । शांतिपूर्ण सह – अस्तित्व भारतीय विदेश नीति जियो और जीने दो का महान सिद्धांत का ही पर्याय है ।

💠 गुट निरपेक्षता का क्या अर्थ है ? 

🔹 गुटों की राजनीति से अलग रहते हुए अपना स्वतंत्र विचार अन्तर्राष्ट्रीय क्षेत्र में प्रस्तुत करना गुट निरपेक्षता की नीति है ।

💠 गुट निरपेक्षता की नीति : –

🔹 अथक प्रयासों से मिली स्वतन्त्रता के पश्चात भारत के समक्ष एक बड़ी चुनौती अपनी संप्रभुता को बचाए रखने की थी । इसके अतिरिक्त भारत को तीव्र आर्थिक व सामाजिक विकास के लक्ष्य को भी प्राप्त करना था । अतः इन दोनों उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए भारत ने गुट निरपेक्षता की नीति को अपनी विदेश नीति के एक प्रमुख तत्व के रूप में अंगीकार किया ।

💠 गुट निरपेक्ष आन्दोलन की स्थापना : –

🔹 इसी कड़ी में 1955 में इंडोनेशिया के शहर बांडुंग में एफ्रो – एशियाई सम्मेलन हुआ , जिसमें गुट निरपेक्ष आंदोलन की नींव पड़ी ।

🔹 सितंबर 1961 में बेलग्रेड में प्रथम गुट निरपेक्ष सम्मेलन के साथ इस आंदोलन का औपचारिक प्रारम्भ हुआ । इसमें 25 देशों ने भाग लिया और इस प्रकार गुट – निरपेक्ष आन्दोलन का आरम्भ हुआ ।

💠 गुट निरपेक्ष आंदोलन के निर्माताओं के नाम : –

🔹 यह आन्दोलन भारत के प्रधानमन्त्री पण्डित जवाहर लाल नेहरू, मिस्र के पूर्व राष्ट्रपति गमाल अब्दुल नासिर व युगोस्लाविया के राष्ट्रपति टीटो, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति डाॅ सुक्रणों एवं घाना – क्वामें एन्क्रूमा आंदोलनों के निर्माता है ।

💠 गुट निरपेक्ष देशों की संख्या : – 

🔹 गुट निरपेक्ष देशों की संख्या स्थापना के समय 25 देशों की थी आज 120 देशों की है । 

💠 भारत द्वारा गुट निरपेक्षता की नीति अपनाये जाने के कारण : –

  • शीत युद्ध को अलग रखने हेतु ,
  • विश्व शांति की इच्छा ,
  • सैनिक गुटों से पृथक् रहने हेतु , 
  • स्वतंत्र विदेश नीति के संचालन की अभिलाषा ,
  • आर्थिक कारण दोनों गुटों से मदद हेतु ,
  • भारत की भौगोलिक स्थिति सुरक्षा हेतु ।

💠 गुट निरपेक्षता की नीति का उद्देश्य : –

🔹 इस नीति के द्वारा भारत जहाँ शीत युद्ध के परस्पर विरोधी खेमों तथा उनके द्वारा संचालित सैन्य संगठनों जैसे – नाटो , वारसा पेक्ट आदि से अपने को दूर रख सका ।

🔹 वहीं आवश्यकता पड़ने पर दोनों ही खेमों से आर्थिक व सामरिक सहायता भी प्राप्त कर सका । एशिया तथा अफ्रीका के नव . स्वतन्त्र देशों के मध्य भविष्य में अपनी महत्वपूर्ण व विशिष्ट स्थिति की संभावना को भांपते हुए भारत ने वि – औपनिवेशिकरण की प्रक्रिया का प्रबल समर्थन किया ।

💠 गुटनिरपेक्ष सम्मेलन : –

  • सितंबर 2016 में गुट निरपेक्ष आंदोलन का 17वां सम्मेलन वेनेजुएला में सम्पन्न हुआ ।
  • 18वां सम्मेलन अक्तूबर 2019 में अजरबैजान में प्रस्तावित है ।
  • 4 मई 2020 को अज़रबैजान की अध्यक्षता में गुटनिरपेक्ष समूह के देशों का एक वर्चुअल सम्मेलन का आयोजन हुआ । इसमें COVID – 19 को मानवता का सबसे बड़ा संकट बताया गया , आतंकवाद और Fake News जैसे मुद्दों पर चिंता व्यक्त की । 

💠 इंडियन नेशनल आर्मी : –

🔹 इसकी स्थापना दूसरे विश्व युद्ध के दौरान सुभाष चंद्र बोस द्वारा गठित की थी ।

💠 एफ्रो – एशियाई एकता : –

  • नेहरू के दौर में भारत ने एशिया और अफ्रीका के नव – स्वतंत्र देशों के साथ संपर्क बनाए ।
  • 1940 और 1950 के दशक में नेहरू ने बड़े मुखर स्वर में एशियाई एकता की पैरोकारी की ।
  • नेहरू की अगुआई में भारत ने मार्च 1947 में एशियाई संबंध सम्मलेन का आयोजन कर डाला ।
  • नेहरू की अगुआई में भारत ने इंडोनेशिया की आज़ादी के लिए भरपूर प्रयास किए ।
  • 1949 में भारत ने इंडोनेशिया की आजादी के समर्थन में एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मलेन किया ।
  • भारत ने अनोपनिवेशीकरण की प्रकिया का समर्थन किया ।
  • भारत ने खासकर दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद का विरोध किया ।
  • इंडोनेशिया के शहर बांडुंग में एफ्रो – एशियाई सम्मेलन 1955 में आयोजन किया गया । जिसमें गुट निरपेक्ष आंदोलन की नींव पड़ी ।

💠 भारत अमेरिकी संबंध : –

🔹 शीतयुद्ध की समाप्ति के बाद भारत द्वारा उदारीकरण एवं वैश्वीकरण की नीति अपनाने के कारण महत्वपूर्ण हो गए है । भारत अब अमेरिका कर विदेश नीति में महत्वपूर्ण स्थान रखता है इसके प्रमुख लक्षण परिलक्षित हो रहे है । 

🔶 भारत और अमेरिका के सम्बन्धो की विशेषताएं : –

  • भारतीय सॉफ्टवेयर निर्यात का 65 प्रतिशत अमेरिका को ।
  • अमेरिकी कंपनी बोईंग के 35 प्रतिशत कर्मचारी भारतीय है ।
  • 3 लाख से ज़्यादा भारतीय सिलिकॉन वाली में कार्यरत है । 
  • अमरीकी कंपनियों में भारतीयों का अत्याधिक योगदान है ।
  • अमेरिका आज भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है ।
  • अमेरिका के विभिन्न राष्ट्रध्यक्षों द्वारा भारत से संबंध प्रगाढ़ करने हेतु उन्होंने भारत की यात्रा ।
  • अमेरिका में बसे प्रवासी भारतीयों का ( खासकर सिलीकॉन वैली ) में प्रभाव है । 
  • सामरिक महत्व के भारत अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते का सम्पन्न होना ।
  • बराक ओबामा की 2015 की भारत यात्रा के दौरान रक्षा सौदों से संबंधित समझौते का नवीनीकरण किया गया तथा कई क्षेत्रों में भारत को त्रण प्रदान करने की घोषणा की गयी । 

🔹 वर्तमान में विभिन्न वैश्विक मंचों पर अमेरिका राष्ट्रपति तथा भारतीय प्रधानमंत्री के बीच हुई मुलाकातों तथा वार्ताओं को दोनों देशों के मध्य आर्थिक , राजनीतिक , सांस्कृतिक तथा सैन्य संबंधों के सृदृढ़ीकरण की दिशा में संकारात्मक संघर्ष के रूप में देखा जा सकता है ।

💠 भारत और रूस सम्बन्ध : –

  • पूर्व साम्यवादी देशों के साथ भारत के संबंध अच्छे हैं , रूस के साथ विशेष रूप से प्रगाढ़ है । 
  • दोनों का सपना बहुध्रुवीय विश्व का है । 
  • दोनों देश सहअस्तित्व , सामूहिक सुरक्षा क्षेत्रीय सम्पुभुता , स्वतंत्रता , स्वतन्त्र विदेश नीति अन्तर्राष्ट्रीय झगड़ों का वार्ता द्वारा हल , संयुक्त राष्ट्रसंघ के सुदृढ़ीकरण तथा लोकतंत्र में विश्वास रखते है ।
  • 2001 में भारत और रूस द्वारा 80 द्विपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर हुए । 
  • भारत रूसी हथियारों का खरीददार है । 
  • रूस से तेल का आयात भारत में होता है । 
  • परमाण्विक योजना तथा अंतरिक्ष योजना में रूसी मदद । 
  • कजाकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान के साथ उर्जा आयात बढ़ाने की कोशिश । 

💠 भारत और रूस ( ब्रिक्स सम्मेलन ) : –

🔹 गोवा में दिसम्बर 2016 में हुए ब्रिक्स ( BRICS ) सम्मेलन के दौरान रूस – भारत के बीच हुए 17 वें वार्षिक सम्मेलन में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं रूस के राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन के बीच रक्षा , परमाणु उर्जा , अंतरिक्ष अभियान समेत आर्थिक संबंधों को बढ़ावा देने एवं उनके लक्ष्यों की प्राप्ति पर बल दिया गया । 

🔹 वैश्विक स्तर पर अन्य देशों की तुलना में रूस के साथ भारत के संबंध करीबी और बेहद मजबूत रहे हैं । भारत और रूस ऐतिहासिक रूप से रक्षा , व्यापार , उर्जा , अंतरिक्ष आदि क्षेत्रों में एक दूसरे से जुड़े रहे है । हाल ही में रूसी रक्षा मंत्रालय के निमंत्रण पर भारतीय रक्षा मंत्री द्वितीय विश्व युद्ध की 75 वी विजय दिवस परेड मे शामिल होने के लिए मास्को ( रूस ) पहुँचे थे ।

🔹 भारतीय रक्षा मंत्री ने अपनी तीन दिवसीय रूस यात्रा के दौरान भारत और रूस के संबंधों को ‘ विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त सामरिक साझेदारी ‘ बताया तथा दोनो देशों के बीच वर्तमान द्विपक्षीय रक्षा अनुबंधों को जारी रखते हुए शीघ्र ही कई अन्य क्षेत्रों में भी द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक मज़बूत करने की प्रतिबद्धता को दोहराया । 

💠 भारत और चीन संबंध : –

🔹 1949 में चीनी क्रांति के बाद चीन की कम्यूनिस्ट सरकार को मान्यता देने वाला भारत पहले देशों में एक था । नेहरू जी ने चीन से अच्छे संबंध बनाने की पहल की । उप – प्रधानमंत्री एवं तत्कालीन गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने आशंका जताई कि चीन भारत पर आक्रमण कर सकता है । नेहरू जी का मत इसके विपरित यह था कि इसकी संभावना नहीं है । 

💠 पंचशील : –

🔹 29 अप्रैल 1954 को भारत के प्रधानमंत्री पं नेहरू तथा चीन के प्रमुख चाऊ एन लाई के बीच द्विपक्षीय समझौता हुआ ।

🔹 जिसके अग्रलिखित पांच सिद्धान्त है :-

  • i ) एक दूसरे के विरूद्ध आक्रमण न करना ।
  • ii ) एक दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना ।
  • iii ) एक दूसरे की क्षेत्रीय अखंडता का आदर करना ।
  • iv ) समानता और परस्पर मित्रता की भावना
  • V ) शांतिपूर्ण सह – अस्तित्व

💠 भारत और चीन के बीच विवाद के मुद्दे : –

  • 1950 में चीन द्वारा तिब्बत को हड़पने तथा भारत चीन सीमा पर बस्तियाँ बनाने के फैसले से दोनों देशों के संबंध एकदम बिगड़ गये । 
  • चीन ने 1962 में लद्दाख और अरूणाचल प्रदेश पर अपने दावे को जबरन स्थापित करने के लिए भारत पर आक्रमण किया । 
  • चीन द्वारा पाकिस्तान को मदद देना । 
  • चीन भारत के परमाणु परीक्षणों का विरोध करता है । 
  • बांग्लादेश तथा म्यांमार से चीन के सैनिक संबंध को भारतीय हितों के खिलाफ माना जाता है । 
  • संयुक्त राष्ट्र संघ ने आतंकी संगठन जैश – ए – मुहम्मद पर प्रतिबंध लगाने वाले प्रस्ताव को पेश किया । चीन द्वारा वीटो पावर का प्रयोग करने से यह प्रस्ताव निरस्त हो गया । 
  • भारत ने अजहर मसूद के आतंवादी घोषित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ में प्रस्ताव पेश किया , जिस पर चीन ने वीटो पावर का प्रयोग किया । 
  • चीन की महत्वाकांक्षी योजना One Belt One Road , जो कि POK से होती हुई गुजरेगी , उसे भारत को घेरने की रणनीति के तौर पर लिया जा रहा है । 
  • वर्ष 2017 में भूटान के भू – भाग , परन्तु भारत के लिए सामरिक रूप से अत्यन्त महत्वपूर्ण डोकलाम पर अधिपत्य के दावे को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव ।
  • चीन द्वारा अरुणाचल प्रदेश में अपनी दावेदारी जताने , पाकिस्तान से चीन की मित्रता एवं भारत के खिलाफ चीनी मदद से भारत चीन संबंध खराब होते है । चीन और भारत सीमा विवाद सुलझाने के लिए प्रयत्नशील है ।

💠 भारत और चीन (  तिब्बत की समस्या ) : –

🔹 जब 1950 में चीन ने तिब्बत पर अपना नियंत्रण जमा लिया । तिब्बती जनता ने इसका विरोध किया । भारत ने इसका खुला विरोध नहीं किया । तिब्बती धार्मिक नेता दलाई लामा ने अपने अनुयायियों सहित भारत से राजनीतिक शरण मांगी और 1959 में भारत ने उन्हें राजनीतिक शरण दे दी । चीन ने भारत के इस कदम का कड़ा विरोध किया । 

💠 भारत और चीन युद्ध : –

🔹 1962 में चीन ने भारत पर हमला कर दिया । भारतीय सेना ने इसका कड़ा प्रतिरोध किया । परन्तु चीनी बढ़त रोकने में नाकामयाब रहे । आखिरकार चीन ने एक तरफा युद्ध विराम घोषित कर दिया । चीन से हारकर भारत की छवि का अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर बहुत नुकसान हुआ । 

💠 युद्ध के परिणाम : –

  • भारत हार गया ।
  • भारतीय विदेश नीति की आलोचना की गई ।
  • कई बड़े सैन्य कमांडरों ने इस्तीफा दे दिया ।
  • रक्षा मंत्री वी के कृष्णमेनन ने मंत्रिमडल छोड़ दिया पहली बार सरकार के खिलाफ अविश्वस पत्र लाया गया ।
  • भारत में मौजूद कम्युनिस्ट पार्टी का बटवारा हो गया भारत की छवि को नुकसान हुआ । 

💠 भारत और चीन सम्बन्धों में सुधार की पहल : –

🔹 1962 के बाद भारत – चीन संबंधों को 1976 में राजनयिक संबंध बहाल कर शुरू किया गया ।

🔹 1979 में श्री अटल बिहारी वाजपेयी ( विदेश मंत्री ) तथा श्री राजीव गांधी ने 1962 के बाद पहले प्रधानमंत्री के तौर पर चीन की यात्रा की परन्तु चीन के साथ व्यापारिक संबंधों पर ही ज्यादा चर्चा हुई ।

🔹 2003 में भी अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रधानमंत्री के तौर पर चीन की यात्रा की जिसमें प्राचीन सिल्करूट ( नाथूला दरा ) को व्यापार के लिए खोलने पर सहमति हुई जो 1962 से बंद था । इससे यह मान्यता भी मिली कि चीन सिक्किम को भारत का अंग मानता है ।

💠 भारत तथा चीन के विवादों को सुलझाने के लिए उठाए गए कदम : –

🔹 चीन और भारत सीमा विवाद सुलझाने के लिए प्रयत्नशील है । सन् 2014 में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत का दौरा किया । इसमें मुख्य समझौता कैलाश मानसरोवर यात्रा हेतू वैकल्पिक सुगम सड़क मार्ग खोलना था ।

🔹 मई 2016 में भारत के राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी चीन यात्रा पर गए है यह यात्रा चीन द्वारा संयुक्त राष्ट्र संघ में पाकिस्तान के आतंकवादी अजहर मसूद के पक्ष में वीटो करने तथा परमाणु आपूर्ति समूह ( एनएसजी ) द्वारा यूरेनियम की भारत को आपूर्ति से पहले चीन द्वारा भारत को एनपीटी पर हस्ताक्षर करने के लिए बाध्य करने जैसे जटिल मुद्दों की छाया में हो रही है ।

🔹 भारत व चीन के मध्य संबंधों को सकारात्मक रूप देने के लिए भारतीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी तथा चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के द्वारा प्रयास किये जा रहे हैं ।

🔹 दोनों देश शांति व पारदर्शिता ( भारत चीन सीमा पर ) बढ़ाने के लिए संकल्पबद्ध है । भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा P2P ( People to People ) संबंधों पर STRENGTH की संकल्पना के आधार पर जोर दिया जा रहा है ।

🔶 STRENGTH :- 

  • S – Spirituality आध्यात्मिकता 
  • T – Tradition , Trade , Technalogy ( रीतियाँ , व्यापार , तकनीक ) 
  • R – Relationship ( संबंध ) 
  • E – Entertainment ( Art , movies ) मनोरंजन ( कला व सिनेमा ) 
  • N – Nature Conservation ( प्रकृति का संरक्षण ) 
  • G – Games ( खेल ) , 
  • T – Tourism ( पर्यटन ) , 
  • H – Health & Healing ( स्वास्थ्य व निदान ) ।

🔹 हाल ही में चीन द्वारा भारत की ओर से निरंतर की जाने वाली मांग को मानते हुए पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन जैश – ए – मुहम्मद के सरगना अजहर मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित करने के सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव पर अपनी सहमति दी गयी , जिसे भारत – चीन सम्बन्धों के मध्य सुधार के रूप में देखा जा सकता है ।

🔹 मई 2018 में दोनों देश स्वास्थ्य , शिक्षा और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्रों में अपफगानिस्तान में अपने विकास कार्यक्रमों के समन्वय के लिए सहमत हुए । 

🔹 11 अक्टूबर 2019 को , चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत और चीन के बीच दूसरी अनौपचारिक बैठक के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ तमिलनाडु के महाबलिपुरम में मुलाकात की ।

💠 भारत और पाकिस्तान संबंध : –

🔹 भारत विभाजन ( 1947 ) द्वारा पाकिस्तान का जन्म हुआ । पाकिस्तान के साथ भारत के संबंध शुरू से ही कड़वे रहे है । कश्मीर मुद्दे पर 1947 में ही दोनों देशों की सेनाओं के बीच छाया – युद्ध छिड़ गया । इसी छाया युद्ध में पाकिस्तान ने कश्मीर के एक बड़े भाग पर अनाधिकृत कब्जा जमा लिया । सरक्रीक रेखा , सियाचिन ग्लेशियर , सीमापार आतंकवाद और कश्मीर दोनों के मध्य विवाद के मुख्य कारण है ।

🔶 सिंधु नदी जलसंधि :-

🔹 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में दोनों के बीच सिंधु नदी जलसंधि की गई । इस पर पं नेहरू और जनरल अयूब खाँ ने हस्ताक्षर किए । विवादों के बावजूद इस संधि पर ठीक – ठाक अमल रहा है ।

🔶 पाकिस्तान का भारत पर हमला :-

🔹 1965 में पाकिस्तान ने भारत पर हमला कर दिया । ततकालीन प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री ने ” जय जवान , जय किसान ‘ का नारा दिया । इस समय भारत में अकाल की स्थिति भी थी । हमारी सेना लाहौर के नजदीक तक पहुंच गई थी । संयुक्त राष्ट्र संघ ( यूएनओ ) के हस्तक्षेप से युद्ध समाप्त हुआ ।

🔶 ताशकंद समझौता :-

🔹 1966 में ताशकंद समझौता हुआ जिसमें भारत की ओर से श्री लाल बहादुर शास्त्री और पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल अयूब खाँ ने हस्ताक्षर किए ।

🔶 1970 बांग्लादेश :-

🔹 1970 में पाकिस्तान के पहले आम चुनावों में पश्चिमी पाकिस्तान में पीपीपी के जुल्फिकार अली भुट्टो जबकि पूर्वी पाकिस्तान ( अब बांग्लादेश ) में अवामी लीग के शेख मुजीबुर्रहमान ( बंग – बंधु ) विजयी हुए । दोनों भागों में संस्कृति एवं भाषा को लेकर गंभीर मतभेद थे । अवामी लीग ने एक परिसंघ बनाने की मांग रखी । पाकिस्तान द्वारा पूर्वी पाकिस्तान में दमन के विरोध में जनता ने विद्रोह कर दिया । शेख मुजीब गिरफ्तार कर लिए गए । 80 लाख बांग्लादेशी शरणार्थी भारत में घुस आए । प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने इस मुक्ति संग्राम को अपना नैतिक एवं भौतिक समर्थन दिया ।

🔶 20 वर्षीय मैत्री संधि :-

🔹 1971 में पाकिस्तान को चीन तथा अमेरिका से मदद मिली । इस स्थिति में श्रीमति इंदिरा गांधी ने सोवियत संघ के साथ 20 वर्षीय मैत्री संधि पर हस्ताक्षर किए ।

🔶 1971 युद्ध :-

🔹 1971 में पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ पूर्णव्यापी युद्ध छेड़ दिया । भारत विजयी हुआ । पाकिस्तानी सेना ने 90000 सैनिकों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया । नये देश बांग्लादेश का उदय हुआ ।

🔶 शिमला समझौता :-

🔹 1972 में शिमला समझौता हुआ इस पर भारत की ओर से प्रधानमंत्री श्रीमति इंदिरा गांधी और पाकिस्तान की ओर से जुल्फिकार अली भुट्टो ने हस्ताक्षर किए ।

🔶 कारगिल संघर्ष :-

🔹 1999 में भारत ने पाकिस्तान से संबंध सुधारने की पहल करते हुए दिल्ली – लाहौर बस सेवा शुरू की परन्तु पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ कारगिल संघर्ष छेड़ दिया । कारगिल में अपने को मुजाहिद्दीन कहने वालों ने सामरिक महत्व के कई इलाकों जैसे द्रास , माश्कोह , वतालिक आदि पर कब्जा कर लिया । भारतीय सेना ने बहादुरी से अपने इलाके खाली करा लिए ।

🔹 पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की भारत यात्रा तथा भारतीय प्रधनमंत्री नरेन्द्र मोदी की पाकिस्तान यात्रा दोनों देशो के बीच संबधों को सुधारने के लिए की गयी । लेकिन पाकिस्तान की और से युद्ध विराम का उल्लंघन व आतंकी घुसपैठ की कार्यवाही ने दोनों देशों के संबंधों में कटुता बनी रही ।

🔶 2016 का आतंकी हमला :-

🔹 2016 में उरी में सेना मुख्यालय पर पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों द्वारा किए गए आतंकी हमले ने तथा जवाब में भारत की ओर से की गयी सैन्य कार्यवाही ने दोनों देशों के मध्य कटुता को और अधिक बढ़ा दिया ।

🔶 2018 आतंकी घुसपैठ :-

🔹 2018 में पाकिस्तान में इमरान खान के नेतृत्व में नव – निर्वाचित सरकार के साथ भारत सरकार द्वारा किए गए शांतिप्रयासों के बाद भी पाकिस्तान की ओर से निरंतर संघर्ष विराम के उल्लंघन तथा आतंकी घुसपैठ के कारण दोनों देशों के मध्य सम्बन्धों में सुधार की संभावनाएं निरंतर कम हुई हैं । 

🔶 2019 आतंकी हमला :-

🔹 जनवरी 2019 में जम्मू – कश्मीर में सी आर पी एफ के जवानों पर पाकिस्तानी आतंकियों द्वारा आत्मघाती हमला किया गया जिसके जवाब में भारतीय वायुसेना द्वारा की गयी कार्यवाही ने दोनों देशों के मध्य युद्ध की स्थितियाँ उत्पन्न की । इसके अतिरिक्त भारत ने पाकिस्तान को सन् 1996 में दिया सर्वाधिक वरीय राष्ट्र ( MFN ) का दर्जा भी छीन लिया ।

💠 म्यांमार : –

🔹 म्यांमार जिसे पूर्व में बर्मा के नाम से जाना जाता था । 1948 में स्वतंत्रता प्राप्त हुई । 01 फरवरी 2021 को म्यांमार में सेना ने सरकार का तख्ता पलट दिया । वहाँ की जनता तब से ही सैनिक शासन के विरूद्ध विरोध प्रर्दशन कर रही है ।

💠 भारत और म्यांमार संबंध : –

  • 1993 में पी ० वी ० नरसिम्हा राव ने ‘ पूर्व की ओर देखों ‘ नीति म्यांमार से शुरू की इस नीति का प्रमुख उद्धेश्य भारत की व्यापारिक दिशा अपने पड़ौसी देश और पश्चिमी देशों से हटाकर उभरते हुए दक्षिणी पूर्वी एशियाई देशों की ओर करना थी । 
  • भारत म्यांमार थाईलैण्ड राजमार्ग परियोजना की कम्बोडिया तक बनाने का निर्णय 2016 में लिया गया । 
  • कालादान मल्टी मॉडल परियोजना के द्वारा कलकत्ता बन्दरगाह और बंगलादेश के सितवे बंदरगाह को जोड़ा गया । 
  • 2017 में उदारवाद वीजा नीति भारत ने म्यांमार के साथ जारी की इसके अंतर्गत म्यांमार के लोग भारत आ सकते है परन्तु उन से कोई शुल्क नहीं लिया जायेगा । 
  • भारत और म्यांमार BIMSTEC के सदस्य भी है । 
  • 2017 में प्रधनमंत्री नरेन्द्र मोदी ने म्यांमार की यात्रा भी की भारत की विदेश नीति को महत्व देने के लिए और अपने रक्षा सम्बन्धों को सशक्त बनाने के लिए भारत म्यांमार के सैनिक प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराता रहता है । 
  • IMBE 2017 , 2018 , 2019 के द्वारा भारत ने म्यांमार के साथ सैनिक अभ्यास भी किये है । 
  • 2019 में म्यांमार के रक्षामंत्री ने भारत की यात्रा के दौरान एक रक्षा सहयोग पर हस्ताक्षर किए है । 
  • अपने Make in India शस्त्र उद्योग को बढ़ावा देने के लिए और अपने सैनिक निर्यात को बढ़ावा देने के लिए भारत ने म्यांमार को साथ रखा है ।

💠 भारत और नेपाल संबंध : –

🔹 वर्तमान में नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा हैं । जो नेपाली कांग्रेस से संबंधित हैं । सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार उन्होंने 13 जुलाई 2021 को कार्यभार संभाला हैं ।

💠 भारत और नेपाल के मधुर संबध : –

  • भारत और नेपाल के बीच द्विपक्षीय संघि है जो दोनों देशों के बीच नागरिकों और वस्तुओं की मुक्त आवाजाही की अनुमति देती है । नेपाल अपने समुद्री मार्ग के लिए कोलकाता बंदरगाह का प्रयोग करता है । 
  • भारतीय सेना की गोरखा रेजीमेंट में नेपाल के पहाड़ी इलाकों से भी युवाओं की भर्ती की जाती है । 
  • भारत , नेपाल को आपदा प्रबंधन के साथ – साथ तकनीकी और मानवीय सहायता भी प्रदान करता है ।

💠 भारत और नेपाल के बीच विवाद  : –

🔹 हाल ही में नेपाल द्वारा आधिकारिक रूप से नेपाल का नवीन मानचित्र जारी किया गया जो उत्तराखंड के कालापानी , लिंपियाधुरा और लिपुलेख को अपना संप्रभु क्षेत्र का भाग मानता है । 

🔹 भारत और बंग्लादेश के बीच ब्रहमपुत्र और गंगा नदी के जल बटॅबारे संबधित विवाद है ।

💠 भारत – इजरायल संबंध : –

🔹 यद्यपि भारत तथा इजरायल के मध्य ऐतिहासिक तथा संस्कृतिक संबंधों को पुरातन समय से ही देखा जा सकता है , परंतु दोनों के मध्य कूटनीतिक संबंध औपचारिक रूप से 1992 में भारत में इजरायल के दूतावास की स्थापना के पश्चात विकसित हुए ।

🔹 परंतु दोनों देशों के मध्य औपचारिक राजयनिक संबंध स्थापित होने पश्चात भी , इनके मध्य संबंधों में सुदृढ़ता 1996 तथा 1998 में भारत में एनडीए सरकार की स्थापना के बाद ही आई । दोनों लोकतांत्रिक देशों के मध्य सरकार के प्रमुख की यात्राओं के पश्चात दोनों के मध्य संबंध और अधिक प्रगाढ़ हुए । 

🔹 2017 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इजरायल तथा दो हजार अठारह में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भारत की यात्रा की । दोनों राष्ट्रों ने सांस्कृतिक आदान – प्रदान , सुरक्षा एवं सैन्य , आतंकवाद विरोधी अंतरिक्ष अनुसंधान जल एवं उर्जा तथा कृषि विकास के क्षेत्रों में व्यापक सहयोग प्रारंभ किया है । 

💠 भारत और श्रीलंका सम्बंध : –

🔶 विवाद :-

  • तमिलों की स्थिति
  • 1987 में भारत द्वारा भेजी गई शांति सेना को श्री लंका के लोगो ने अंदरूनी मामलो में हस्तक्षेप समझा ।

🔶 सहयोग :-

  • भारत – श्रीलंका के मध्य सांस्कृतिक , बौद्धिक , धार्मिक और भाषायी संबंध प्राचीन काल से हैं । 
  • भारत ने श्रीलंका के साथ मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं जिससे व्यापारिक संबंध दृढ़ हुए हैं । 
  • 26 सितंबर 2020 को वर्चुअल माध्यम से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने श्रीलंका के प्रधानमंत्री श्री एच . ई महिन्द्रा राजपक्षे के साथ दिपक्षीय सम्मेलन किया ।

💠 भारत की परमाणु नीति क्या है ? 

🔹 भारत प्रारम्भ से ही आण्विक अस्त्रों के निर्माण के विरुद्ध रहा है । दूसरे महायुद्ध में हिरोशिमा तथा नागासाकी में हुई विभीषिका की याद सबके मस्तिष्क में थी । आजादी के बाद भारत समेत विभिन्न विकासशील देशों ने निर्गुट रहकर निःशस्त्रीकरण पर जोर दिया । इस उद्देश्य से नेहरू ने आण्विक हथियारों के निर्माण को प्रोत्साहन नहीं दिया । 

🔹 परन्तु औद्योगिकरण के एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास आवश्यक था । इसलिए औद्योगिक घटक के रूप में परमाणु कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की गई । भारत ने शांतिपूर्ण उद्देश्यों की जरूरत के रूप में परमाणु ऊर्जा के विकास का लक्ष्य रखा जिसकी शुरुआत डॉ . होमी भाभा के निर्देशन में सन् 1940 के दशक के अंतिम वर्षों में हुई ।

💠 भारत का परमाणु कार्यक्रम : –

🔹 मई 1974 में पोखरण में भारत ने अपना पहला परमाणु परीक्षण किया फिर मई 1998 में पोखरण में ही भारत ने पाँच परमाणु परीक्षण कर स्वयं को परमाणु सम्पन्न घोषित कर दिया । इसके तुरंत बाद पाकिस्तान ने भी परमाणु परीक्षण कर स्वयं को परमाणु शक्ति घोषित कर दिया ।

🔹 भारत ने 1968 की परमाणु अप्रसार संधि एवं 1995 की ” व्यापक परीक्षण निषेध संधि ” CTBT ” पर हस्ताक्षर नहीं किए क्योंकि भारत इन्हें भेदभावपूर्ण मानता है ।

💠 भारत की परमाणु नीति के सिद्धांत : –

  • भारत शांतिपूर्ण कार्यों हेतू परमाणु शक्ति का प्रयोग करेगा । 
  • भारत अपनी सुरक्षा तथा आवश्यकतानुसार परमाणु हथियारों का निर्माण करेगा । 
  • भारत परमाणु हथियारों का प्रयोग पहले नहीं करेगा । 
  • परमाणु हथियारो को प्रयोग करने की शक्तिसर्वोच्च राजनीतिक सत्ता के हाथ होगी ।

💠 भारतीय विदेश नीति के प्रमुख आदर्श व उद्देश्य : – 

  • अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति और सुरक्षा के लिए यथासम्भव प्रयास करना , 
  • अन्तर्राष्ट्रीय विवादों को मध्यस्थता द्वारा निपटाये जाने की नीति को यथासम्भव प्रोत्साहन देना , 
  • सभी राज्यों एवं राष्ट्रों के मध्य परस्पर सम्मानपूर्ण सम्बन्ध बनाये रखना , 
  • अन्तर्राष्ट्रीय कानून और विभिन्न राष्ट्रों के पारस्परिक सम्बन्धों में सन्धियों के पालन के प्रति आस्था बनाये रखना ,
  • सैनिक गुटबन्दियों और सैनिक समझौतों से स्वयं को पृथक् रखना तथा इस प्रकार की गुटबन्दियों को निरुत्साहित करना , 
  • उपनिवेशवाद के प्रत्येक रूप का उग्र विरोध करना , 
  • प्रत्येक प्रकार की साम्राज्यवादी भावना को निरुत्साहित करना , 
  • उपनिवेशवाद , जातिवाद और साम्राज्यवाद से पीड़ित देशों की जनता की सहायता करना । 

💠 भारत के विदेश नीति के निर्धारक तत्व : –

  • भौगोलिक तत्व , 
  • ऐतिहासिक परम्पराएँ , 
  • सैनिक तत्व , 
  • विचारधाराओं का प्रभाव , 
  • आर्थिक तत्व , 
  • तकनीकी तत्व , 
  • अन्तर्राष्ट्रीय तत्व , 
  • राष्ट्रीय चरित्र , 
  • राष्ट्रीय हित ।

💠 भारतीय विदेश नीति के मुख्य सिद्धांत या विशेषताएँ : –

  • साम्राज्यवाद तथा उपनिवेशवाद का विरोध ।
  • विश्व – शांति में विश्वास । 
  • संयुक्त राष्ट्र के कार्यक्रमों का समर्थन । 
  • रंगभेद का विरोध । 
  • बिना शर्त विदेशी सहायता प्राप्ति । 
  • गुट – निरपेक्षता की नीति । 
  • राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा एवं संवर्द्धन ।
  • शांतिपूर्ण सह – अस्तित्व का समर्थन । 
  • शस्त्रीकरण का विरोध तथा निःशस्त्रीकरण का समर्थन ।  
  • साधनों की पवित्रता ।

💠 भारतीय विदेश नीति की सफलता या उपलब्धियाँ : –

  • भारत की गुट – निरपेक्षता की नीति विश्व शांति के हित में रही तथा मानव जाति को तृतीय विश्व युद्ध से बचाया । 
  • भारत की विदेश नीति ने निःशस्त्रीकरण पर बल दिया , जिस नीति का सैद्धान्तिक रूप से सभी देशों ने समर्थन किया । 
  • भारत ने साम्राज्यवाद , उपनिवेशवाद व रंगभेद विरोधी नीति अपनाकर एशिया व अफ्रीका में अच्छा स्थान बनाया । 
  • भारत की गुट – निरपेक्षता की नीति को अन्ततः दोनों महाशक्तियों ने स्वीकार किया तथा प्रशंसा की । 
  • भारत की अन्तर्राष्ट्रीय पहचान , एक शांतिप्रिय लोकतांत्रिक राष्ट्र के रूप में हुई । 
  • भारत ने संयुक्त राष्ट्र संघ तथा सार्क देशों के बीच महत्वपूर्ण भूमिका निभायी ।

💠 विश्व राजनीति में गुट निरपेक्ष आन्दोलन की उपलब्धियाँ ( महत्व या योगदान ) 

  • विश्व शांति के क्षेत्र में संयुक्त राष्ट्र का भरपूर सहयोग किया गया । 
  • दोनों महाशक्तियों के बीच चल रहे शीत युद्ध को समाप्त करने में सहयोग दिया ।
  • अन्तर्राष्ट्रीय जगत में तृतीय शक्ति के रूप में गुट निरपेक्ष देश उभरा इससे तृतीय विश्व युद्ध का खतरा टला । 
  • नि : शस्त्रीकरण क्षेत्र में गुट निरपेक्ष देशों ने महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह किया । 
  • अविकसित राष्ट्रों के मध्य आर्थिक सहयोग एवं विकास में गुट – निरपेक्ष राष्ट्रों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है । 
  • नवोदित राष्ट्रों को महाशक्तियों के जाल से बचाकर स्वतंत्र विकास का अवसर प्रदान किया । 
  • गुट – निरपेक्ष आन्दोलन ने नवोदित राष्ट्रों को स्वतंत्र रूप से विदेश नीति का निर्धारण करने की प्रेरणा दी । 

💠 गुट निरपेक्ष आन्दोलन की असफलताएँ : –

  • यह आन्दोलन अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति को एक नई दिशा देने में असफल रहा । 
  • गुट निरपेक्षता से ही राष्ट्रीय सुरक्षा स्थापित नहीं हो सकती । 
  • भारत – चीन सन् 1962 के युद्ध के समय अनेक गुट – निरपेक्ष देशों की भारत के साथ कोई सहानुभूति नहीं थी , अनेक पश्चिमी राष्ट्रों ने त्वरित भारत की सहायता के लिए हाथ बढ़ाया , जबकि वे राष्ट्र इस आन्दोलन के सदस्य नहीं थे । 
  • गुट निरपेक्ष आन्दोलन को सुसंगठित रूप न दे पाना । 
  • इस आन्दोलन को अवसरवादी नीति भी कुछ आलोचकों ने कहा है । 
  • गुट – निरपेक्ष राष्ट्रों के हितों में टकराव देखा गया । 
  • गुट निरपेक्ष आन्दोलन एक नैतिक आन्दोलन है ।

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