Class 12 history chapter 9 notes in hindi, शासक और इतिवृत्त मुगल दरबार notes

शासक और इतिवृत्त Notes: Class 12 history chapter 9 notes in hindi

TextbookNCERT
ClassClass 12
SubjectHistory
ChapterChapter 9
Chapter Nameशासक और इतिवृत्त
CategoryClass 12 History
MediumHindi

Class 12 history chapter 9 notes in hindi, शासक और इतिवृत्त मुगल दरबार notes इस अध्याय मे हम मुगल काल के बारे में उनके शासक , शासन व्यवस्था , धर्म , राजधानी इत्यादि के बारे में जानेंगे ।

मुगल कोन थे ?

दो महान शासक वंशो के वंशज थे । माता की ओर से वे चीन और मध्य एशिया के मंगोल शासक चंगेज खाँ ( जिनकी मृत्यु 1227 ई० में हुई ) के उतराधिकारी थे । पिता की ओर से वे ईरान एव वर्तमान तुर्की के शासक तैमूर ( जिनकी मृत्यु 1404 ई० में हुई ) के वंशज थे ।

🔹 परन्तु मुगल अपने को मुगल या मंगोल कहलवाना पसंद नहीं करते थे । ऐसा इसलिए था क्योकि चंगेज खाँ से जुड़ी स्मृतियाँ मुगालो के प्रतियोगियो उजवेग से भी संबधित थी । दुसरी तरफ़ मुगल , तैमूर के वंशज होने पर गर्व का अनुभव करते थे । ऐसा इसलिए क्योकि उनके इस महान पूर्वज ने 1398 ई० में दिल्ली पर कब्जा कर लिया था ।

🔹 मुगलो ने अपनी वंशावली का प्रर्दशन चित्र बनाकर किया । प्रत्येक मुगल शासक ने तैमूर के साथ अपना चित्र बनवाया । पहला मुगल शासक बाबर मातृपक्ष से चंगेज़ खाँ का संबधी था । वो तुर्की बोलता था और उसने मंगोलो का उपहास करते हुए उन्हें बर्बर गिरोह के रूप में उल्लेखित किया ।

🔹16 वी शताब्दी के दौरान यूरोपीयो ने परिवार की इस शाखा के भारतीय शासको का वर्णन करने के लिए मुगल शब्द का प्रयोग किया । यहाँ तक कि रडयार्ड किपलिंग की ( जंगल बुक ) के युवा नायक मोगली का नाम भी इससे व्युत्पन्न हुआ है ।

🔹 साम्राज्य के संस्थापक ज़हीरुद्दीन मुहम्मद बाबर को उसके मध्य ऐशियाई स्वदेश फरगना के प्रतिद्वंद्वी उज्बेगो ने भगा दिया था । नासिरुद्दीन हुमायूँ , शेरशाह सूर से पराजित होकर इरान के सफावी शासक के दरवार में निर्वासित होने पर बाध्य हुआ । चगताई तुर्क स्वयं को चंगेज खाँ के सबसे बड़े पुत्र का वंशज मानते थे ।

बाबर 1526 ई० – 1530 ई० :-

🔹 प्रथम मुगल शासक बाबर ( 1526 ई० – 1530 ई० ) ने जब 1494 ई० मे फरगाना राज्य का उत्तराधिकार प्राप्त किया तो उनकी उम्र केवल 12 बर्ष की थी । मंगोलो की दूसरी शाखा , उजबेगो के आक्रमण के कारण उसे अपनी पैतृक गगद्दी छोड़नी पड़ी ।

🔹 अनेक वर्षों तक भटकने के बाद उसने 1504 ई० में काबुल पर कब्जा कर लिया ।

🔹 उसने 1526 ई० मे दिल्ली के सुल्तान इब्राहिम लोदी को पानीपत मे हराया और दिल्ली , आगरा , को अपने कब्जे मे कर लिया ।

🔹1527 ई० में खानुवा में राणा सांगा राजपूत राजाओ और उनके समर्थकों को हराया | 1528 ई० में चंदेरी में राजपूतो को हराया ।

🔹 16 वी शताब्दी के युद्धों में तोप और गोलाबारी का पहली बार इस्तेमाल हुआ । बाबर ने इनका पानीपत की पहली लड़ाई में प्रभावी ढंग से प्रयोग किया ।

हुमायूँ :-

🔹 हुमायूँ ने अपने पिता की वसीयत के अनुसार जायदाद का बंटवारा किया । प्रत्येक भाई को एक प्रांत मिला । उसके भाई मिर्जा कामरान की महत्वकांक्षाओं के कारण हुमायूँ अपने अफगान प्रतिद्वंद्वियों ने सामने फीका पड़ गया ।

🔹 शेर खान ने हुमायूँ को दो बार हराया , 1539 ई० में चौसा में एव 1540 ई० कन्नौज में । इन पराजयों ने हुमायूँ को ईरान की ओर भागने को बाध्य किया ।

🔹 ईरान में हुमायूँ ने सफ़ाविद शाह की मदद ली । उसने 1555 ई० में दिल्ली पर पुंन कब्जा कर लिया परन्तु उससे अगले बर्ष इस इमारत में एक दुर्घटना में उसकी मृत्यु हो गई ।

अकबर :-

🔹 13 बर्ष की अल्पायु में सम्राट बना ।

🔹 1568 ई० में सिसिदयो की राजधानी चितौड़ और 1569 ई० में रणथम्भौर पर कब्जा कर लिया ।

🔹 1579 ई० – 1580 ई० के बीच मिर्जा हाकिम के पक्ष में विद्रोह हुए ।

🔹 सफविदों को हराकर कंधार पर कब्जा किया और कश्मीर को भी जोड़ लिया । मिर्जा हाकिम की मृत्यु के पश्चात काबुल को भी अपने राज्य में मिला लिया । दक्कन के अभियानों की शुरुआत हुई ।

जहाँगीर :-

🔹 मेवाड़ के सिसोदिया शासक अमर सिंह ने मुगलों की सेवा स्वीकार की इसके बाद सिक्खों , अहामो और अहमदनगर के खिलाफ अभियान चलाए गए , जो पूर्णत: सफल नही हुए ।

🔹 जहाँगीर के शासन के आंतिम वर्षों में राजकुमार खुर्रम जो बाद में सम्राट शाहजहाँ कहलाया , ने विद्रोह किया ।

शाहजहाँ :-

🔹 अफगान अभिजात खान जहान लोदी ने विद्रोह किया और वह पराजित हुआ ।

🔹 अहमदनगर के विरुद्ध अभियान हुआ , जिसमे बुंदेलों की हार हुई और ओरछा पर कब्जा कर लिया गया ।

🔹 उत्तर – पश्चिम में बल्ख पर कब्जा करने के लिए उज्बेगो के विरुद्ध अभियान हुआ , जो असफल रहा । परिणामस्वरूप कांधार सफविदों के हाथ मे चला गया ।

🔹 1632 ई० में अतः अहमदनगर को मुगलो के राज्य में मिला लिया गया और बीजापुर की सेना ने सुलह के लिए निवेदन किया ।

🔹 1657 ई० – 1658 ई० में शाहजहाँ के पुत्रों के बीच उत्तराधिकार को लेकर झगड़ा शुरू हो गया । इसमे औरंजेब की विजय हुई और दाराशिकोह समेत तीनो भइयो को मौत के घाट उतार दिया गया ।

🔹 शाहजहाँ को उसकी शेष जिदंगी के लिए आगरा में कैद कर दिया गया ।

औरंगजेब :-

🔹 1663 ई० में उत्तर – पूर्व में अहोमो की पराजय हुई , परन्तु उन्होंने 1690 ई० में पुनः विद्रोह कर दिया ।

🔹 उत्तर -पश्चिम मे यूसफजई और सिक्खों ने विद्रोह किया । इसका कारण था उनकी आंतरिक राजनीति और उत्तराधिकार के मसलों में मुगलो का हस्तक्षेप ।

🔹 मराठा सरदार शिवाजी के विरुद्ध मुगल अभियान आरंभ में सफ़ल रहे , परंतु ओरंगजेब ने शिवाजी का अपमान किया और शिवाजी आगरा स्थित मुगल कैदखाने से भाग निकले ।

🔹 राजकुमार अकबर ने औरंगजेब के दक्कन के शासको के विरुद्ध विद्रोह किया । जिसमें उसे मराठो और दक्कन की सल्तनत का सहयोग मिला । अतः वह ईरान ( सफविद के पास ) से भाग गया ।

🔹 अकबर के विद्रोह के पश्चात औरंगजेब ने दक्कन के शासको के विरुद्ध सेनाये भेजी । 1685 ई० में बीजपुर और 1687 में गोलकुंडा को मुगलो ने आपने राज्य में मिला लिया । 1668 ई० में औरंगजेब ने दक्कन में मराठों ( जो छापामार पद्धति का उपयोग कर रहे थे ) के विरुद्ध अभियान का प्रबध किया ।

मुगल राजधानी :-

🔹 16 वी – 17 वी शताब्दीयो के दौरान मुगलो की राजधानियाँ बड़ी ही तेजी से स्थानांतरित होती रही ।

🔹 बाबर ने लोदियो की राजधानी आगरा पर अधिकार किया तथापि उसके शासन काल के दौरान राजसीदरबार भिन्न – भिन्न स्थानों पर लगाये जाते रहे ।

🔹 1560 के दशक में अकबर ने लाल बलुये पत्थर से आगरे में किले का निर्माण किया ।

🔹 1570 के दशक में अकबर ने फतेहपुर सीकरी को राजधानी बनाया । इसका एक कारण था कि सीकरी अजमेर को जाने वाली सीधी सड़क पर स्थित था जहाँ ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल बन चुकी थी ।

🔹 मुगल बादशाहों के चिश्ती सूफियों के साथ घनिष्ठ सम्बध बने । अकबर ने सीकरी में जमा मस्जिद के बगल में ही शेख सलीम चिश्ती के लिए सगमरमर का मकबरा बनवाया ।

🔹 फतेपुर सीकरी में बुलंद दरवाजा ( विशाल मेहराबी प्रवेश द्वार ) बनवाने का उद्देश्य वहाँ के लोगो को गुजरात मे मुगल विजय की याद दिलाना था ।

🔹 1885 ई० में उत्तर – पश्चिम की ओर अधिक नियंत्रण में लाने के लिए राजधानी को लाहौर स्थानांतरित कर दिया गया । इस तरह अकबर ने 13 बर्षो तक ( 1548 ई० ) सीमा पर गहरी चौकसी बनाये रखी ।

🔹 1648 ई० में राजधानी शाहजहानाबाद स्थानांतरित हो गयी ।

इतिवृत्त ( इतिहास का वृतांत )

🔹 वह लेख जिनसे किसी क्षेत्र के इतिहास के बारे में पता चलता है इतिवृत्त कहलाते हैं । मुग़ल साम्राज्य के सभी इतिवृत पांडुलिपियों के रूप में मिले है ।

पांडुलिपियां :-

🔹 वह सभी लेख जो हाथो से लिखे जाते है पांडुलिपियां कहलाते है । मुगल राजाओं द्वारा कई इतिवृत्त तैयार करवायें गए । इन इतिवृत्तों की रचना मुगल राजाओं द्वारा इसीलिए करवाई गई ताकि आने वाली पीढ़ी को मुग़ल शासन के बारे में जानकारी मिल सके । इन सभी इतिवृत्तों से मुगल साम्राज्य के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां मिलती हैं ।

इतिवृत्त की रचना :-

🔹 मुगल बादशाहो द्वारा तैयार करवाए गए इतिवृत्त साम्राज्य और उसके दरबार के अध्यन के महत्वपूर्ण स्रोत है ।

🔹 ये इतिवृत्त साम्राज्य के अंतर्गत आने वाले सभी लोगो के सामने एक प्रबुद्ध राज्य के दर्शन के उद्देश्य से लाए गए थे ।

🔹 शासक यह भी सुनिश्चित कर लेना चाहते थे कि भावी पीढ़ियों के लिए उनके शासक का विवरण उपलब्ध हो ।

🔹 मुगल इतिवृत्त के लेखक निरपवाद से दरबारी ही रहे । उन्होंने जो इतिहास लिखे उनके केंद्र बिंदु में थी – शासक पर केंद्रित घटनाए , शासक का परिवार , दरबार व अभिजात , युद्ध और प्रशासनिक व्यवस्थाएं ।

🔹 इनके लेखको की निगाह में सम्राज्य व दरबार का इतिहास और बादशाह का इतिहास एक ही था ।

🔹 मुगल भारत की सभी पुस्तकें पांडुलिपियों के रूप में थी आर्थात वे हाथ से लिखी होती थी । इन रचनाओं का मुख्य केंद्र शाही कितबखाना था ।

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