Class 8 Science chapter 6 notes in hindi जंतुओं में जनन notes

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कक्षा 8 विज्ञान अध्याय 6 नोट्स: जंतुओं में जनन class 8 notes

TextbookNcert
ClassClass 8
SubjectScience
ChapterChapter 6
Chapter Nameजंतुओं में जनन notes
MediumHindi

क्या आप Class 8 Science chapter 6 notes in hindi ढूंढ रहे हैं? अब आप यहां से जंतुओं में जनन notes download कर सकते हैं। इस अध्याय में हम जैव विविधता के महत्व, विलुप्त हो रही प्रजातियाँ, उनके कारण और संरक्षण के उपायों के बारे में अध्ययन करते हैं। इस अध्याय में हम जनन के प्रकार – लैंगिक और अलैंगिक जनन, नर और मादा जनन अंगों, निषेचन, भ्रूण विकास, जीवन चक्र, क्लोनिंग आदि में जनन प्रक्रिया के बारे में विस्तार से पढ़ेंगे।

जनन :-

🔹 वह जैव प्रक्रिया जिसके द्वारा सभी प्राणी अपने जीवनकाल में अपने-जैसे जीवों की उत्पत्ति कर अपने अस्तित्व को कायम रखते हैं, जनन कहलाता है।

जंतओं में जनन के प्रकार :-

🔹 पौधों की ही तरह जंतुओं में भी जनन की दो विधियाँ होती हैं। यह हैं:

  • लैंगिक जनन :- इस प्रकार का जनन जिसमें नर तथा मादा युग्मक का संलयन होता है, लैंगिक जनन कहलाता है।
  • अलैंगिक जनन :- इस प्रकार के जनन को जिसमें केवल एक ही जनक नए जीव को जन्म देता है अलैंगिक जनन कहते हैं।

लैंगिक जनन :-

🔹 लैंगिक जनन में नर और मादा जननांग होते हैं। नर और मादा जननांग आपस में मिलकर वह बाद में विकसित होकर एक जीव बनता है।

नर जनन तंत्र :-

🔹 नर जनन अंगों में एक जोड़ा वृषण, दो शुक्राणु नलिका तथा एक शिश्न (लिंग) होते हैं। वृषण नर युग्मक उत्पन्न करते हैं जिन्हें शुक्राणु कहते हैं। वृषण लाखों शुक्राणु उत्पन्न करते हैं। शुक्राणु यद्यपि बहुत सूक्ष्म होते हैं, पर प्रत्येक में एक सिर, एक मध्य भाग एवं एक पूँछ होती है। हर शुक्राणु में कोशिका के सामान्य संघटक पाए जाते हैं।

मादा जनन अंग :-

🔹 मादा जननांगों में एक जोड़ी अंडाशय, अंडवाहिनी (डिंब वाहिनी) तथा गर्भाशय होता है। अंडाशय मादा युग्मक उत्पन्न करते हैं जिसे अंडाणु (डिंब) कहते हैं।

निषेचन :-

🔹 जब शुक्राणु, अंडाणु के संपर्क में आते हैं तो इनमें से एक शुक्राणु अंडाणु के साथ संलयित हो जाता है। शुक्राणु और अंडाणु का यह संलयन निषेचन कहलाता है। निषेचन के समय शुक्राणु और अंडाणु संलयित होकर एक हो जाते हैं। निषेचन के परिणामस्वरूप युग्मनज का निर्माण होता है।

निषेचन के प्रकार :-

🔹 निषेचन मुख्यतः दो प्रकार का होता है।

  • आंतरिक निषेचन :- वह निषेचन जो मादा के शरीर के अंदर होता है आंतरिक निषेचन कहलाता है। मनुष्य, गाय, कुत्ते, तथा मुर्गी इत्यादि अनेक जंतुओं में आंतरिक निषेचन होता है।
  • बाह्य निषेचन :- वह निषेचन जिसमें नर एवं मादा युग्मक का संलयन मादा के शरीर के बाहर होता है, बाह्य निषेचन कहलाता है। यह मछली, स्टारफिश जैसे जलीय प्राणियों में होता है।

IVF (इनविट्रो निषेचन) :-

🔹 IVF अथवा इनविट्रो निषेचन एक कृत्रिम प्रजनन तकनीक है जिसमें उन स्त्रियों की सहायता की जाती है जिनकी अंडवाहिनी अवरुद्ध होती है और वे शिशु उत्पन्न करने में असमर्थ होती हैं। इस प्रक्रिया में, ऐसी स्थिति में डॉक्टर (चिकित्सक) ताजा अंडाणु एवं शुक्राणु एकत्र करके उचित माध्यम में कुछ घंटों के लिए एक साथ रखते हैं जिससे निषेचन संभव हो सके। अगर निषेचन हो जाता है तो युग्मनज को लगभग एक सप्ताह तक विकसित किया जाता है जिसके पश्चात् उसे माता के गर्भाशय में स्थापित किया जाता है। माता के गर्भाशय में पूर्ण विकास होता है, तथा शिशु का जन्म सामान्य शिशु की तरह ही होता है।

परखनली शिशु :-

🔹 IVF विधि से जन्मे शिशु को आमतौर पर “परखनली शिशु” कहा जाता है, हालांकि यह नाम भ्रामक है क्योंकि शिशु का संपूर्ण विकास परखनली में नहीं बल्कि माता के गर्भाशय में होता है।

भ्रूण का परिवर्धन :-

🔹 निषेचन के बाद युग्मनज बनता है, जो लगातार विभाजित होकर कोशिकाओं के गोले में बदल जाता है। फिर ये कोशिकाएँ समूह बनाकर ऊतकों और अंगों का निर्माण करती हैं। इस विकसित होती संरचना को भ्रूण कहा जाता है। गर्भाशय में भ्रूण का विकास होता रहता है और धीरे-धीरे हाथ, पैर, सिर, आँखें, कान आदि शरीर के अंग विकसित हो जाते हैं।

गर्भ :-

🔹 भ्रूण की वह अवस्था जिसमें सभी शारीरिक भागों की पहचान हो सके गर्भ कहलाता है। जब गर्भ का विकास पूरा हो जाता है तो माँ नवजात शिशु को जन्म देती है।

जरायुज जंतु :-

🔹 वह जंतु जो सीधे ही शिशु को जन्म देते हैं जरायुज जंतु कहलाते हैं। उदाहरण: मनुष्य, गाय, कुत्ता।

अंडप्रजक जंतु :-

🔹 वे जंतु जो अंडे देते हैं अंडप्रजक जंतु कहलाते हैं। उदाहरण: मुर्गी, मेंढ़क, कबूतर।

मेंढक का जीवन चक्र :-

  • अंडे – मादा मेंढक पानी में अंडे देती है।
  • टैडपोल – अंडों से छोटे-छोटे टैडपोल निकलते हैं जो मछली जैसे होते हैं और पानी में तैरते हैं।
  • परिवर्तन – टैडपोल का शरीर बदलता है, इसमें टाँगें उगती हैं और पूँछ धीरे-धीरे गायब हो जाती है।
  • वयस्क मेंढक – पूरी तरह विकसित होकर टैडपोल वयस्क मेंढक बन जाता है।

कायांतरण :-

🔹 लारवा का कुछ उग्र-परिवर्तनों द्वारा वयस्क जंतु में बदलने की प्रक्रिया कायांतरण कहलाती है।

मुकुलन :-

🔹 हाइड्रा में मुकुल द्वारा नए जीव का विकास होता है। इस प्रकार के अलैंगिक जनन को मुकुलन कहते हैं।

द्विखंडन :-

🔹 अमीवा स्वयं दो भागों में विभाजित होकर संतति उत्पन्न करता है। इस प्रकार के अलैंगिक प्रजनन को द्विखंडन कहते हैं।

अलैंगिक जनन की विधियाँ:

  1. मुकुलन:
    • हाइड्रा में एक या अधिक उभार दिखाई देते हैं।
    • ये उभार नए जीव होते हैं जो एक ही जनक से विकसित होते हैं।
    • यीस्ट में भी ऐसा ही मुकुलन देखा जाता है।
    • केवल एक जनक से नए जीव के बनने की प्रक्रिया को अलैंगिक जनन कहते हैं।
    • इसलिए हाइड्रा में यह जनन मुकुलन कहलाता है।
  2. द्विखंडन:
    • अमीबा एक एककोशिकीय जीव है।
    • जनन की शुरुआत केन्द्रक के दो भागों में विभाजन से होती है।
    • इसके बाद पूरी कोशिका भी दो भागों में बँट जाती है, और हर भाग में एक केन्द्रक होता है।
    • इस प्रकार एक जनक से दो नए अमीबा बनते हैं।
    • इस प्रक्रिया को द्विखंडन कहते हैं।
  3. अन्य विधियाँ: मुकुलन और द्विखंडन के अलावा भी कुछ अन्य अलैंगिक जनन की विधियाँ होती हैं (जैसे कायिक जनन, खंडन आदि), जिनमें एकल जनक से संतति उत्पन्न होती है।

क्लोनिंग :-

🔹 किसी समरूप कोशिका या किसी अन्य जीवित भाग अथवा संपूर्ण जीव को कृत्रिम रूप से उत्पन्न करने की प्रक्रिया क्लोनिंग कहलाती है।

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