कक्षा 8 विज्ञान अध्याय 8 नोट्स: बल तथा दाब class 8 notes
| Textbook | Ncert |
| Class | Class 8 |
| Subject | Science |
| Chapter | Chapter 8 |
| Chapter Name | बल तथा दाब notes |
| Medium | Hindi |
क्या आप Class 8 Science chapter 8 notes in hindi ढूंढ रहे हैं? अब आप यहां से बल तथा दाब notes download कर सकते हैं। इस अध्याय में हम बल के प्रकार (संपर्क बल, गुरुत्वाकर्षण बल, घर्षण बल), बल के प्रभाव, बल के कारण होने वाले गति परिवर्तन, दाब की परिभाषा, ठोस, तरल और गैसों में दाब, वायुमंडलीय दाब जैसी अवधारणाओं को सरलता से समझते हैं।
बल :-
🔹 विज्ञान में किसी वस्तु पर लगने वाले धक्के (अभिकर्षण) या खिंचाव (अपकर्षण) को बल कहते हैं।
अन्योन्य क्रिया के कारण बल :-
🔹 बल लगने के लिए कम से कम दो वस्तुओं में अन्योन्य क्रिया होनी आवश्यक है। जैसे हम केवल कार के पीछे खड़े रहने मात्र से उसे गति नहीं दे सकते। जब तक की हम कार को धक्का नहीं लगाते । इस प्रकार हमारे व कार के मध्य यह क्रिया अन्योन्य क्रिया कहलाती है।
बल में परिमाण और दिशा :-
- किसी वस्तु पर एक ही दिशा में लगाए गए बल जुड़ जाते हैं।
- यदि किसी वस्तु पर दो बल विपरीत दिशा में कार्य करते हैं तो इस पर लगने वाला कुल (नेट) बल दोनों बलों के अंतर के बराबर होता है।
- यदि किसी वस्तु पर विपरित दिशाओं में लगने वाले बल बराबर है। तो उस पर लगने वाला नेट बल शून्य होगा।
बल वस्तु की गति की अवस्था में परिवर्तन कर सकता है :-
🔹 किसी वस्तु की चाल अथवा उसकी गति की दिशा, अथवा दोनों में होने वाले परिवर्तन को इसकी गति की अवस्था में परिवर्तन द्वारा व्यक्त किया जाता है। अतः, बल द्वारा किसी वस्तु की गति की अवस्था में परिवर्तन लाया जा सकता है।
🔹 उदाहरण: कोई फुटबॉल ज़मीन पर पड़ी है (विराम अवस्था)। जब उसे लात मारी जाती है, तो वह चलने लगती है – इसका अर्थ है कि बल ने उसकी गति की अवस्था बदली।
गति की अवस्था :-
🔹 किसी वस्तु की गति की अवस्था का वर्णन इसकी चाल तथा गति की दिशा से किया जाता है। विराम अवस्था को शून्य चाल की अवस्था माना जाता है। कोई वस्तु विराम अवस्था में अथवा गतिशील में हो सकती है. दोनों ही इसकी गति की अवस्थाएँ हैं।
बल किसी वस्तु की आकृति में परिवर्तन कर सकता है :-
🔹 यह सत्य है कि बल लगाने से वस्तु की आकृति परिवर्तित हो सकती है। जब किसी वस्तु पर बल लगाया जाता है, तो उसकी आकृति या आकार में परिवर्तन हो सकता है। यह परिवर्तन वस्तु की प्रकृति और बल की दिशा/प्रकार पर निर्भर करता है।
- उदाहरण:
- गुब्बारे को दबाने पर उसकी आकृति बदल जाती है या वह फट सकता है।
- गुंधे आटे की लोई को बेलने पर वह गोल और चपटी चपाती का रूप ले लेती है।
- रबड़ की गेंद को दबाने पर वह थोड़ी चपटी हो जाती है।
बल के प्रकार :-
🔹 संपर्क बल : जब बल लगाने वाला वस्तु के सीधे संपर्क में होता है, तब यह बल कार्य करता है। उदाहरण: मांसपेशीय बल, घर्षण बल
🔹 गैर-संपर्क बल : जब बल बिना किसी संपर्क के कार्य करता है, तब यह गैर-संपर्क बल कहलाता है। उदाहरण: गुरुत्वाकर्षण बल, चुंबकीय बल, स्थिरवैद्युत बल
संपर्क बल के उपप्रकार :-
🔹 मांसपेशीय बल : यह बल हमारे शरीर की मांसपेशियों द्वारा लगता है। हमारी मांसपेशियों के क्रियास्वरूप लगने वाले बल को पेशीय बल कहते हैं। उदाहरण: किसी वस्तु को उठाना, खींचना।
🔹 घर्षण बल : दो सतहों के संपर्क में आने पर उत्पन्न होने वाला बल जो गति का विरोध करता है उसे घर्षण बल कहते है। उदाहरण: फर्श पर लुढ़कने वाली गेंद धीरे-धीरे धीमी हो जाती है और अन्त में रुक जाती है।
गैर-संपर्क बल के उपप्रकार :-
🔹 गुरुत्वाकर्षण बल: वस्तुएँ पृथ्वी की ओर इसलिए गिरती हैं क्योंकि यह उन्हें अपनी ओर आकर्षित करती हैं। पृथ्वी द्वारा वस्तुओं को अपनी ओर खींचने वाला बल, गुरुत्वाकर्षण बल कहलाता हैं। उदाहरण: वस्तु का नीचे गिरना।
🔹 चुंबकीय बल: जब कोई चुंबक लोहे, निकल या कोबाल्ट जैसी धातुओं को आकर्षित या प्रतिकर्षित करता है, तो उस क्रिया को चुंबकीय बल कहते हैं। उदाहरण: चुंबक और पिन।
🔹 स्थिरवैद्युत बल: एक आवेशित वस्तु द्वारा किसी दूसरी आवेशित अथवा अनावेशित वस्तु पर लगाया गया बल स्थिरवैद्युत बल कहलाता है। उदाहरण: प्लास्टिक की कंघी द्वारा कागज़ के टुकड़े खींचना।
दाब :-
🔹 किसी पृष्ठ के प्रति एकांक क्षेत्रफल पर लगने वाले बल को दाब कहते हैं। किसी पृष्ठ का क्षेत्रफल जितना कम होगा, उस पर दाब उतना ही अधिक होगा।
\(\text{दाब} = \frac{\text{बल}}{\text{क्षेत्रफल जिस पर यह लगता है}}\)
द्रवों तथा गैसों (तरल) द्वारा लगाया गया दाब :-
🔹 किसी पात्र में रखे तरल द्वारा पात्र की दीवारों के प्रति एकांक क्षेत्रफल पर आरोपित बल को तरल दाब कहते हैं।
वायुमंडल :-
🔹 हमारे चारों ओर वायु है, वायु के इस आवरण को वायुमंडल कहते हैं।
वायुमंडलीय दाब :-
🔹 वायुमंडलीय वायु पृथ्वी के तल से कई किलोमीटर ऊपर तक फैली हुई है। इस वायु द्वारा लगाए गए दाब को वायुमंडलीय दाब कहते हैं।