कक्षा 9 भूगोल अध्याय 6 नोट्स: जनसंख्या class 9 notes
| Textbook | Ncert |
| Class | Class 9 |
| Subject | Geography |
| Chapter | Chapter 6 |
| Chapter Name | जनसंख्या नोट्स |
| Medium | Hindi |
आप यहां से jansankhya class 9 notes download कर सकते हैं। इस अध्याय मे हम जनगणना, जनसंख्या घनत्व, जनसंख्या वृद्धि, आयु संरचना, लिंगानुपात, साक्षरता दर आदि बारे में विस्तार से पड़ेगे।
जनगणना :-
एक निश्चित समयांतराल में जनसंख्या की आधिकारिक गणना, ‘जनगणना’ कहलाती है।
भारत की सबसे पहली जनगणना :-
भारत में सबसे पहले 1872 में जनगणना की गई थी। हालांकि 1881 में पहली बार एक संपूर्ण जनगणना की जा सकी। उसी समय से प्रत्येक दस वर्ष पर जनगणना होती है।
जनगणना करके जनसंख्या के बारे में जानना क्यों ज़रूरी है?
चूँकि मानव पृथ्वी के संसाधनों का उत्पादन और उपभोग करता है, इसलिए यह जानना आवश्यक है:
- देश में कितने लोग रहते हैं?
- वे कहाँ और कैसे रहते हैं।
- उनकी संख्या में वृद्धि के कारण क्या हैं।
- उनकी क्या विशेषताएँ हैं? (जैसे- शिक्षा, आयु, व्यवसाय)
जनसंख्या का महत्त्व :-
- जनसंख्या सामाजिक अध्ययन में एक मुख्य आधार है।
- जनसंख्या के आधार पर हम समाज, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण को बेहतर समझते हैं।
- जनसंख्या की संख्या, वितरण, वृद्धि और विशेषताएँ पर्यावरण को समझने की मूल पृष्ठभूमि प्रदान करती हैं।
भारत की कुल जनसंख्या (2011) :-
मार्च 2011 तक भारत की जनसंख्या 12,106 लाख (≈ 121 करोड़) थी। यह विश्व की कुल जनसंख्या का 17% से अधिक है। भारत केवल विश्व के 2.4% भूभाग पर स्थित है, लेकिन जनसंख्या बहुत अधिक है।
जनसंख्या का वितरण :-
यह विशाल जनसंख्या भारत के 32.8 लाख वर्ग किमी क्षेत्र (विश्व के स्थलीय भाग का 2.4%) में असमान रूप से फैली है।कहीं अधिक घनी आबादी (जैसे: उत्तर प्रदेश), तो कहीं बहुत कम (जैसे: सिक्किम, लक्षद्वीप)।
भारत का सर्वाधिक जनसंख्या वाला राज्य :-
2011 की जनगणना के अनुसार देश की सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य उत्तर प्रदेश है जहाँ की कुल आबादी 1,990 लाख है। उत्तर प्रदेश में देश की कुल जनसंख्या का 16 प्रतिशत हिस्सा निवास करता है।
भारत का न्यूनतम जनसंख्या वाला राज्य :-
भारत का न्यूनतम जनसंख्या वाला राज्य हिमालय क्षेत्र का राज्य, सिक्किम हैं जिसकी कुल आबादी केवल 6 लाख ही है।
भारत का न्यूनतम जनसंख्या वाला केंद्रशासित प्रदेश :-
लक्षद्वीप देश का सबसे कम जनसंख्या वाला केंद्रशासित प्रदेश हैं। जिसमें केवल 64,429 हजार लोग निवास करते हैं।
क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा राज्य :-
क्षेत्रफल की दृष्टि से राजस्थान सबसे बड़ा राज्य है, जिसकी आबादी भारत की कुल जनसंख्या का केवल 5.5 प्रतिशत है।
भारत की आधी आबादी वाले राज्य :-
भारत की लगभग आधी आबादी केवल पाँच राज्यों में निवास करती है। ये राज्य हैं उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, – बिहार, पश्चिम बंगाल एवं आंध्र प्रदेश।
जनसंख्या घनत्व :-
प्रति इकाई क्षेत्रफल में रहने वाले लोगों की संख्या को जनसंख्या घनत्व कहते हैं। जनसंख्या घनत्व, असमान वितरण का बेहतर चित्र प्रस्तुत करता है।
भारत में जनसंख्या घनत्व :-
2011 में भारत का जनसंख्या घनत्व 382 व्यक्ति प्रति वर्ग कि० मी० था। जहाँ बिहार का जनसंख्या घनत्व 1,102 व्यक्ति प्रति कि.मी. है, वहीं अरुणाचल प्रदेश में यह 17 व्यक्ति प्रति कि० मी० है।
भारत में सबसे अधिक जनसंख्या घनत्व वाला राज्य :-
2011 की जनगणना के अनुसार सबसे अधिक जनसंख्या घनत्व वाला राज्य पश्चिमी बंगाल है। यहाँ जनसंख्या घनत्व 1028 व्यक्ति प्रति वर्ग कि.मी. है।
नोट: दिल्ली का घनत्व इससे भी अधिक है — 11,320 व्यक्ति प्रति वर्ग कि.मी. — लेकिन दिल्ली एक केंद्र शासित प्रदेश है, राज्य नहीं। इसलिए राज्यों में पश्चिम बंगाल सबसे अधिक घनत्व वाला है।
भारत में सबसे कम जनसंख्या घनत्व वाला राज्य :-
सबसे कम जनसंख्या घनत्व वाला राज्य अरूणाचल प्रदेश है, यहाँ जनसंख्या घनत्व 17 व्यक्ति प्रति वर्ग कि.मी. है।
मध्यम जनसंख्या घनत्व वाले राज्य :-
असम, तथा अधिकांश प्रायद्वीपीय राज्य (जैसे महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु आदि)।
- 📍 कारण:
- पहाड़ी और पथरीला भूभाग
- मध्यम वर्षा
- छिछली एवं कम उपजाऊ मिट्टी
उत्तरी मैदान के तीन सर्वाधिक घनत्व वाले राज्य :-
- बिहार
- उत्तर प्रदेश
- पश्चिम बंगाल
भारत से अधिक जनसंख्या घनत्व वाले देश :-
केवल बांग्लादेश का जनसंख्या घनत्व भारत से अधिक है। बांग्लादेश → लगभग 1,200 व्यक्ति प्रति वर्ग कि.मी.
जनसंख्या की वृद्धि दर :-
जनसंख्या की वृद्धि दर, जनसंख्या बढ़ने की गति बताता है। वृद्धि दर में बढ़ी हुई जनसंख्या की आधार वर्ष की जनसंख्या से तुलना की जाती है। इसे वार्षिक या दशकीय गति से ज्ञात किया जाता है।
जनसंख्या वृद्धि :-
जनसंख्या वृद्धि का अर्थ होता है, किसी विशेष समय अंतराल में, जैसे 10 वर्षों के भीतर, किसी देश/राज्य के निवासियों की संख्या में परिवर्तन।
इस प्रकार के परिवर्तन को दो प्रकार से व्यक्त किया जा सकता है। पहला, सापेक्ष वृद्धि तथा दूसरा, प्रति वर्ष होने वाले प्रतिशत परिवर्तन के द्वारा।
🔹 A. निरपेक्ष वृद्धि :-
प्रत्येक वर्ष या एक दशक में बढ़ी जनसंख्या, कुल संख्या में वृद्धि का परिमाण है। पहले की जनसंख्या को बाद की जनसंख्या से घटा कर इसे प्राप्त किया जाता है। इसे ‘निरपेक्ष वृद्धि’ कहा जाता है। उदाहरण: 2011 की जनसंख्या – 2001 की जनसंख्या
🔹 B. वार्षिक वृद्धि :-
किसी वर्ष में प्रति 100 व्यक्तियों पर कितने लोग बढ़े, इसे वार्षिक वृद्धि दर कहते हैं। इसे प्रतिशत में बताया जाता है। उदाहरण: 2% वार्षिक वृद्धि दर का मतलब है कि प्रति 100 लोगों पर 2 लोग बढ़ रहे हैं।
भारत की जनसंख्या में वृद्धि (1951–2011) :-
- 1951: 3,610 लाख (≈ 36.1 करोड़)
- 2011: 12,100 लाख (≈ 121 करोड़)
- 1951–1981 के बीच वृद्धि दर लगातार बढ़ी → तेज़ जनसंख्या वृद्धि।
- 1981 के बाद वृद्धि दर में धीरे-धीरे कमी आने लगी।
- कारण: जन्म दर में कमी और परिवार नियोजन कार्यक्रमों की सफलता।
जनसंख्या परिवर्तन की प्रक्रियाएँ :-
जनसंख्या में परिवर्तन तीन मुख्य प्रक्रियाओं से होता है:
- जन्म दर
- मृत्यु दर
- प्रवास
1. जन्म दर :-
एक वर्ष में प्रति हज़ार व्यक्तियों में जितने जीवित बच्चों का जन्म होता है, उसे ‘जन्म दर’ कहते हैं। यह वृद्धि का एक प्रमुख घटक है क्योंकि भारत में हमेशा जन्म दर, मृत्यु दर से अधिक रहा है।
2. मृत्यु दर :-
एक वर्ष में प्रति हजार व्यक्तियों में मरने वालों की संख्या को ‘मृत्यु दर’ कहा जाता है। मृत्यु दर में तेज़ गिरावट भारत की जनसंख्या में वृद्धि की दर का मुख्य कारण है।
3. प्रवास :-
लोगों का एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में चले जाने को प्रवास कहते हैं। प्रवास आंतरिक (देश के भीतर) या अंतर्राष्ट्रीय (देशों के बीच) हो सकता है।
भारत में अधिकतर प्रवास गांव से शहर की तरफ होता है क्योंकि शहरों में बेहतर रोजगार, शिक्षा तथा स्वास्थ्य इन लोगों को आकर्षित करते भारत में प्रवास के कारण नगरीय जनसंख्या में वृद्धि हुई हैं।
🔹 ग्रामीण क्षेत्रों से प्रवास के कारण :-
- गरीबी
- बेरोज़गारी
- कम आय
- कम सुविधाएँ
🔹 शहरी क्षेत्रों में प्रवास के कारण :-
- रोजगार के अधिक अवसर
- बेहतर जीवन स्तर
- शिक्षा व स्वास्थ्य सुविधाएँ
- सेवाओं की अधिक उपलब्धता
🔹 प्रवास का प्रभाव :-
- शहरों की जनसंख्या तेजी से बढ़ती है
- ग्रामीण क्षेत्रों की जनसंख्या में कमी
- प्रवास उम्र एवं लिंग के दृष्टिकोण से नगरीय एवं ग्रामीण जनसंख्या की संरचना को भी परिवर्तित करता है।
🔹 प्रवास के परिणाम :-
- शहरीकरण में वृद्धि :-
- 1951 में शहरी जनसंख्या: 17.29%
- 2011 में शहरी जनसंख्या: 31.80%
- बड़े शहरों की संख्या में वृद्धि :-
- 2001 में 10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहर: 35
- 2011 में यह बढ़कर: 53 हो गए।
- 2023 में यह और बढ़कर: 59 हो गए।
किशोरावस्था :-
किशोरावस्था वह आयु है जब कोई व्यक्ति बाल्यावस्था से अधिक आयु का होता है किंतु उसकी आयु प्रौढ़ से कम होती है। ऐसा व्यक्ति प्रायः 10 से 19 वर्ष के आयु-वर्ग में होता है।
- भारत की कुल जनसंख्या का लगभग 1/5 हिस्सा (20%) किशोर हैं।
- यह समूह देश का भविष्य का मानव संसाधन है।
किशोरों की विशेष आवश्यकताएँ :-
इस आयु वर्ग में शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास तेजी से होता है। इसलिए इन्हें अधिक पोषक तत्त्व, संतुलित आहार, स्वास्थ्य देखभाल की आवश्यकता होती है।
किशोरों की समस्याएँ :-
- भारत में किशोरों को प्राप्त भोजन में पोषक तत्त्व अपर्याप्त होते हैं।
- बहुत-सी किशोर बालिकाएँ रक्तहीनता से पीड़ित रहती हैं।
- कुपोषण से:
- विकास रुक सकता है
- स्वास्थ्य खराब हो सकता है
- विकास की प्रक्रिया में उनकी समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।
समाधान :-
- जागरूकता: किशोर बालिकाओं को उनकी समस्याओं के प्रति संवेदनशील और जागरूक बनाना चाहिए।
- शिक्षा का प्रसार: शिक्षा के प्रसार और गुणवत्ता में सुधार के द्वारा इन समस्याओं के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सकती है।
लिंगानुपात :-
भारत में प्रति हजार पुरुषों पर महिलाओं की संख्या को लिंगानुपात कहते हैं।
परिवार नियोजन कार्यक्रम (1952) :-
भारत ने 1952 में एक व्यापक परिवार नियोजन कार्यक्रम शुरू किया।
🔸 उद्देश्य:
- परिवारों के आकार को सीमित रखना
- जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करना
- व्यक्ति के स्वास्थ्य और कल्याण में सुधार करना
🔸 परिवार कल्याण कार्यक्रम का लक्ष्य: जिम्मेदार और सुनियोजित पितृत्व को बढ़ावा देना।
राष्ट्रीय जनसंख्या नीति 2000 :-
- यह नीति कई वर्षों के नियोजित प्रयासों का परिणाम है।
- इस नीति का मुख्य लक्ष्य एक नीतिगत ढाँचा प्रदान करना है।
राष्ट्रीय जनसंख्या नीति 2000 के प्रमुख लक्ष्य :-
- शिक्षा: 14 वर्ष से कम आयु के सभी बच्चों को निःशुल्क शिक्षा प्रदान करना।
- शिशु मृत्यु दर: शिशु मृत्यु दर को प्रति 1000 जीवित जन्मों पर 30 से कम करना।
- टीकाकरण: बच्चों को टीकाकरण द्वारा रोकथाम होने वाली बीमारियों से मुक्त कराना।
- लैंगिक समानता: लड़कियों की शादी की उम्र बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना।
- परिवार नियोजन: परिवार नियोजन कार्यक्रम को जन-केंद्रित (लोगों की जरूरतों पर आधारित) बनाना।