Class 9 Science chapter 7 गति notes in hindi

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कक्षा 9 विज्ञान अध्याय 7 नोट्स: गति class 9 notes in hindi

TextbookNcert
ClassClass 9
SubjectScience
ChapterChapter 7
Chapter Nameगति नोट्स
MediumHindi

आप यहां से gati class 9 notes in hindi download कर सकते हैं। इस अध्याय मे हम दूरी और विस्थापन, वेग एक रेखीय समान और असमान गति, त्वरण, समान गति और त्वरित गति के लिए दूरी-समय तथा वेग समय ग्राफ, एक समान वृतीय गति आदि के बारे में विस्तार से पड़ेगे।

🚀 गति :-

📖 परिभाषा: गति वह अवस्था है जिसमें कोई वस्तु समय के साथ अपनी स्थिति बदलती है। दूसरे शब्दों में हम यह भी कह सकते हैं कि, किसी भी वस्तु का समय के अनुसार अपना स्थान छोड़कर किसी दूसरे स्थान में चले जाने को गति (Motion) कहा जाता है। उदाहरण: सड़क पर चलती कार 🚗, उड़ता पक्षी 🐦, बहता पानी 💧

⚡ गति की अवस्थाएँ :-

मुख्य रूप से, किसी वस्तु की गति की दो अवस्थाएँ होती हैं:

🔸 1️⃣ विरामावस्था :- जब कोई वस्तु अपने चारों ओर की स्थिर वस्तुओं के सापेक्ष स्थिर प्रतीत होती है, तो वह विरामावस्था में कहलाती है। उदाहरण: 🌳 पृथ्वी पर खड़े पेड़-पौधे, 🏠 घर में रखी कुर्सी व मेज, मेज पर रखी किताब।

🔸 2️⃣ गतिमान अवस्था :- जब कोई वस्तु अपने चारों ओर की स्थिर वस्तुओं के सापेक्ष अपनी स्थिति बदलती है, तो वह गतिअवस्था में कहलाती है। उदाहरण: 🚲 सड़क पर चलती साइकिल, 🚌 दौड़ती कार या बस, 🐦 उड़ता हुआ पक्षी।

🔄 सापेक्ष गति :- 

जब कोई वस्तु एक अन्य वस्तु के सापेक्ष स्थिर दिखाई देती हैं, परंतु वही वस्तु किसी दूसरी वस्तु के सापेक्ष गतिशील दिखाई देती है, तो इसे सापेक्ष गति कहते हैं।

❓ क्या गति सापेक्ष है :-

किसी वस्तु की गति अलग-अलग देखने वालों को अलग-अलग दिखाई लग सकती है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि हम उसे कहाँ से देख रहे हैं।

  • उदाहरण:
    • 🚌 बस में बैठा यात्री: बस में बैठे यात्री को सड़क के किनारे के पेड़ पीछे भागते हुए दिखाई देते हैं।
    • 🧍‍♂️ सड़क पर खड़ा व्यक्ति: सड़क पर खड़े व्यक्ति को बस और उसमें बैठे यात्री आगे जाते हुए दिखाई देते हैं।

बस में एक यात्री दूसरे यात्री को देखता है: बस में बैठे एक यात्री अपना साथी यात्री विराम (स्थिर) में दिखाई देता है।

👉 निष्कर्ष: गति हमेशा एक संदर्भ बिंदु के सापेक्ष ही मापी जाती है। एक ही समय में, एक ही वस्तु गति में भी हो सकती है और विराम में भी—यह निर्भर करता है कि हम किस संदर्भ बिंदु से देख रहे हैं।

📌 स्थिति :- 

किसी वस्तु का स्थान, जो किसी चुने हुए बिंदु (मूल बिंदु) के सापेक्ष मापा जाए, उसे स्थिति कहते हैं। यह वस्तु और प्रेक्षक/निर्देश बिंदु के बीच की दूरी और दिशा से बताई जाती है।

उदाहरण: जैसे आप अपने स्कूल की स्थिति को दर्शाने के लिए अपने घर को मूल बिन्दु मान लेते हैं, और बोलते हैं कि हमारा स्कूल घर से 5 किलोमीटर की दूरी पर है। इसका अर्थ है कि 5 किलोमीटर की दूरी पर आपके स्कूल की स्थिति है।

  • यहाँ मूल बिंदु: घर
  • वस्तु: स्कूल
  • स्थिति: 5 km दूर

📍 निर्देश बिंदु (मूल बिंदु) :- 

किसी वस्तु की स्थिति को बताने के लिए हमें एक निर्देश बिंदु की आवश्यकता होती है, इस निर्देश बिंदु को ही मूल बिंदु कहा जाता है। मूल बिंदु हमारी सुविधा के अनुसार कोई भी हो सकता है (जैसे आपका घर, कोई दुकान, आदि)।

📊 मूल भौतिक राशियाँ :-

मूल भौतिक राशियाँ वे राशियाँ जिन्हें सीधे मापा जा सकता है और जिनकी इकाई अंतर्राष्ट्रीय इकाई प्रणाली (SI) में परिभाषित है, उन्हें मूल भौतिक राशियाँ कहते हैं।

📌 मूल भौतिक राशियों की संख्या :- 

कुल 7 मूल भौतिक राशियाँ होती हैं।

क्रमांकभौतिक राशि (Quantity)SI इकाई (Unit)
1लंबाई (Length)मीटर (metre, m)
2द्रव्यमान (Mass)किलोग्राम (kilogram, kg)
3समय (Time)सेकंड (second, s)
4विद्युत धारा (Electric Current)एम्पीयर (ampere, A)
5ऊष्मागतिक तापमान (Thermodynamic Temperature)केल्विन (kelvin, K)
6प्रकाश तीव्रता (Luminous Intensity)कैंडेला (candela, cd)
7द्रव्य की मात्रा (Amount of Substance)मोल (mole, mol)

⚖️ भौतिक राशियों का वर्गीकरण :- 

भौतिक राशियों के दो वर्गों में रखा जाता है।

🔸 (क) अदिश राशियाँ :- वे भौतिक राशियाँ, जिन्हें व्यक्त करने के लिए परिमाण व मात्रक की आवश्यकता होती है, अदिश राशियाँ कहलाती हैं। जैसे- द्रव्यमान, दूरी, समय, चाल, ऊर्जा, कार्य, आयतन, शक्ति आदि।

🔸 (ख) सदिश राशियाँ :- वे भौतिक राशियाँ जिन्हें व्यक्त करने के लिए परिमाण व मात्रक के साथ-साथ दिशा की भी आवश्यकता होती है, सदिश राशियाँ कहलाती है। जैसे- विस्थापन, वेग, त्वरण, बल, आवेग, संवेग आदि।

🚶 सरल रेखीय गति :-

गति का सबसे सरल साधारण प्रकार सरल रेखीय गति होती है। जब कोई वस्तु सरल रेखीय पथ पर गतिमान होती है, तब उसे सरल रेखीय गति (Linear Motion) कहा जाता है।

📏 दूरी :-

किसी गतिमान वस्तु के द्वारा तय किए गए पथ की कुल लंबाई को दूरी (Distance) कहा जाता है। यह एक भौतिक (अदिश) राशि है तथा इसके परिमाण को केवल अंकीय मान द्वारा व्यक्त किया जा सकता है। अर्थात् दूरी में केवल परिमाण होता है, दिशा नहीं। दूरी का si मात्रक मीटर होता है जिसे अंग्रेजी के ‘m’ वर्ण द्वारा इंगित करते हैं।

  • उदाहरण:
    • यदि कोई बच्चा 100 मीटर दौड़ की ट्रैक पर दौड़ता है, तो तय की गई लंबाई = उसकी दूरी।
    • यदि कोई कार गाँव से शहर तक 50 km सड़क तय करती है, तो यह उसकी दूरी है।

↔️ विस्थापन :- 

किसी गति करती हुई वस्तु की प्रारंभिक व अंतिम स्थिति के बीच की न्यूनतम दूरी को वस्तु का विस्थापन कहते हैं। इसमें परिमाण तथा दिशा दोनों होते हैं तथा यह सदिश राशि होती है। विस्थापन धनात्मक (+), ऋणात्मक (–) या शून्य (0) भी हो सकता है। इसका मात्रक भी मीटर (m) होता है।

📊 दूरी और विस्थापन में अंतर :-

दूरी विस्थापन
किसी वस्तु द्वारा तय किए गए वास्तविक पथ की लंबाई दूरी कहलाती है।वस्तु की प्रारंभिक और अंतिम स्थिति के बीच की न्यूनतम दूरी विस्थापन कहलाती है।
यह एक अदिश राशि है → इसमें केवल परिमाण होता है।यह एक सदिश राशि है → इसमें परिमाण और दिशा दोनों होते हैं।
दूरी हमेशा धनात्मक (Positive) होती है और कभी शून्य (0) नहीं होती।विस्थापन धनात्मक, ऋणात्मक या शून्य (0) हो सकता है।
दूरी का मान विस्थापन के बराबर या उससे अधिक हो सकता है।विस्थापन का मान दूरी के बराबर या उससे कम होता है।

🚘 एकसमान गति :- 

जब कोई वस्तु समान समयांतराल में समान दूरी तय करती है, तो उसे एकसमान गति कहते हैं। उदाहरण: कोई कार हर 1 सेकंड में 50 m चलती है।, ⏰ घड़ी की सुई का घूमना।, 🌍 पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर परिक्रमा।

🚦 असमान गति :- 

जब कोई वस्तु समान समयांतराल में असमान दूरी तय करती है, तो उसे असमान गति कहते हैं। उदाहरण: 🚗 भीड़भाड़ वाली सड़क पर चलती कार।, 🏃‍♂️ पार्क में दौड़ता हुआ व्यक्ति।, ✈️ उड़ान भरता या उतरता हुआ हवाई जहाज।

📏 गति की दर का मापन :- 

वस्तु द्वारा इकाई समय में तय की गई दूरी के उपयोग से उस वस्तु की गति की दर प्राप्त की जा सकती है। इस राशि को चाल कहा जाता है।

🏁 चाल :- 

किसी वस्तु द्वारा इकाई समय में तय की गई दूरी को उसकी चाल कहते हैं। 

🔸 चाल की विशेषताएँ :- 

  • चाल एक अदिश राशि है क्योंकि इसमें केवल परिमाण होता है, दिशा नहीं।
  • चाल का मुख्य मात्रक मीटर प्रति सेकंड है।
  • यह ms⁻¹ चिह्न द्वारा प्रदर्शित की जाती है। 
  • चाल का अन्य मात्रक सेंटीमीटर प्रति सेकंड (cms) और किलोमीटर प्रति घंटा (kmh⁻¹) है। 

🚄 औसत चाल :- 

यह आवश्यक नहीं है कि वस्तु की गति नियत हो। अधिकतर अवस्थाओं में वस्तुएँ असमान गति में होंगी। इसलिए हम उन वस्तुओं की गति की दर को उनकी औसत चाल के रूप में व्यक्त करते हैं। 

सरल शब्दों में, जब वस्तु की चाल समय-समय पर बदलती रहती है, तब उसकी कुल गति को औसत चाल से व्यक्त किया जाता है।

📌 औसत चाल का सूत्र:

वस्तु की औसत चाल उसके द्वारा तय की गई कुल दूरी को कुल समयावधि से भाग देकर प्राप्त किया जा सकता है।

  \(\text{औसत चाल} = \frac{\text{तय की गई कुल दूरी}}{\text{कुल समयावधि}}\)

  • उदाहरण :-
  • एक कार 2 घंटे में 100 km दूरी तय करती है।
    • औसत चाल = \( \frac{100}{2} = 50 , km/h \)
  • इसका मतलब यह नहीं कि कार हर समय 50 km/h की चाल से चली होगी। कभी यह इससे अधिक रही होगी, कभी इससे कम।

➡️ वेग :- 

जब किसी वस्तु की चाल के साथ दिशा भी बताई जाए, तो उसे वेग कहते हैं। अतः, एक निश्चित दिशा में चाल को वेग कहते हैं। 

🔸 वेग की विशेषताएँ :- 

  • किसी वस्तु का वेग समान या असमान हो सकता है।
  • यह वस्तु की चाल, गति की दिशा या दोनों के परिवर्तन के साथ परिवर्तित हो सकती है।
  • वेग एक सदिश राशि है यानि इसमें परिमाण और दिशा दोनों होते हैं।
  • वेग चाल की तरह ही समान या असमान हो सकता है।
  • वेग का SI मात्रक = मीटर प्रति सेकंड (ms⁻¹  या m/s)।

📌 औसत वेग :- 

जब एक वस्तु सीधी रेखा में बदलती हुई चाल के साथ गति कर रही है, तो हम इसके गति की दर के परिमाण को औसत वेग के द्वारा व्यक्त कर सकते हैं।

📌 औसत वेग का सूत्र:

इसकी गणना औसत चाल की गणना के समान ही होती है। 

  \(\text{औसत वेग} = \frac{\text{कुल विस्थापन}}{\text{कुल समयावधि}}\)

🔸 विशेष स्थिति में औसत वेग का सूत्र: (समान रूप से परिवर्तित वेग) :- यदि वस्तु का वेग समान रूप से परिवर्तित हो रहा है, तब दिए गए प्रारंभिक वेग और अंतिम वेग के अंकगणितीय माध्य के द्वारा औसत वेग प्राप्त किया जा सकता है।

यदि किसी वस्तु का वेग समान रूप से बदल रहा हो, तो: \(\text{औसत वेग} = \frac{\text{प्रारंभिक वेग (u)} + \text{अंतिम वेग (v)}}{2}\)

📊 चाल और वेग में अंतर :-

चालवेग
किसी वस्तु द्वारा एकांक समय में तय की गई दूरी को चाल कहते हैं।किसी वस्तु द्वारा एकांक समय में तय किया गया विस्थापन वेग कहलाता है।
यह एक अदिश राशि (Scalar Quantity) है – इसमें केवल परिमाण और मात्रक होते हैं।यह एक सदिश राशि (Vector Quantity) है – इसमें परिमाण, मात्रक और दिशा तीनों होते हैं।
चाल का परिमाण, वेग के परिमाण के बराबर या अधिक हो सकता है।वेग का परिमाण, चाल के परिमाण से अधिक नहीं हो सकता
औसत चाल कभी शून्य (0) नहीं होती।औसत वेग शून्य (0) भी हो सकता है (यदि वस्तु वापस प्रारंभिक बिंदु पर आ जाए)।

⚡ त्वरण :- 

किसी वस्तु का त्वरण प्रति इकाई समय में उसके वेग में होने वाला परिवर्तन है। अर्थात् प्रति इकाई समय में वेग में होने वाले परिवर्तन को त्वरण कहते हैं। 

🔸 त्वरण की विशेषताएँ :- 

  • यदि त्वरण, वेग की दिशा में है तो इसे धनात्मक लिया जाता है ।
  • यदि यह वेग के विपरीत दिशा में है तो इसे ऋणात्मक लिया जाता है। 
  • त्वरण का मात्रक = मीटर प्रति सेकंड² (m/s²)।

⚡ त्वरण का सूत्र:

त्वरण (a) = (वेग में परिवर्तन) / (लिया गया समय)

यदि एक वस्तु का वेग प्रारंभिक वेग u से t समय में बदलकर v हो जाता है, तो त्वरण निम्न होगा।

\(a = \frac{v – u}{t}\)

  • a = त्वरण
  • v = अंतिम वेग
  • u = प्रारंभिक वेग
  • t = समय

इस प्रकार की गति को त्वरित गति कहा जाता है।

📌 त्वरण के प्रकार :- 

🔸 एकसमान त्वरण :- यदि एक वस्तु सीधी रेखा में चलती है और इसका वेग समान समयांतराल में समान रूप से घटता या बढ़ता है, तो वस्तु के त्वरण को एकसमान त्वरण कहा जाता है। स्वतंत्र रूप से गिर रही एक वस्तु की गति एकसमान त्वरित गति का उदाहरण है(जैसे, ऊँचाई से छोड़ा गया एक पत्थर)। 

🔸 असमान त्वरण :- जब वस्तु का वेग समान समयांतराल में असमान दर से बदलता है, तो इसे असमान त्वरण कहते हैं। उदाहरण के लिए, शहर की सड़क पर चलती हुई एक कार (कार बार-बार अपनी गति बढ़ाती और घटाती है, और रुकती है)।

📐 गति के समीकरण :-

यदि कोई वस्तु सीधी रेखा में एकसमान त्वरण (Uniform Acceleration) से चलती है, तो उसके वेग, समय, त्वरण और तय की गई दूरी के बीच संबंध को गति के समीकरण कहते हैं।

तीन गति के समीकरण :-

  1. पहला समीकरण (वेग-समय संबंध)
    • v = u + at
    • 👉 अंतिम वेग (v) = प्रारंभिक वेग (u) + (त्वरण × समय)
  2. दूसरा समीकरण (दूरी-समय संबंध)
    • s = ut + \(\frac{1}{2}\) at2
    • 👉 दूरी (s) = (प्रारंभिक वेग × समय) + \(\frac{1}{2}\) (त्वरण × समय²)
  3. तीसरा समीकरण (वेग-दूरी संबंध)
    • v2 − u2 = 2as
    • 👉 अंतिम वेग² – प्रारंभिक वेग² = 2 × त्वरण × दूरी

जहाँ:

  • u = प्रारंभिक वेग
  • v = अंतिम वेग
  • a = त्वरण
  • t = समय
  • s = तय की गई दूरी

🔄 एकसमान वृत्तीय गति :- 

अगर कोई वस्तु वृत्तीय पथ पर एकसमान चाल से चलती है तो उसकी गति को एकसमान वृत्तीय गति कहा जाता है। उदाहरण: पत्थर को रस्सी से बाँधकर घुमाना, पृथ्वी का सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाना।

गणना (उदाहरण के लिए)

  • यदि वृत्त की त्रिज्या = r
  • एक चक्कर पूरा करने का समय = T
  • तो वर्गीय चाल (Speed): \(V = \frac{2 \pi r}{T}\)
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