कक्षा 9 विज्ञान अध्याय 8 नोट्स: बल तथा गति के नियम class 9 notes
| Textbook | Ncert |
| Class | Class 9 |
| Subject | Science |
| Chapter | Chapter 8 |
| Chapter Name | बल तथा गति के नियम नोट्स |
| Medium | Hindi |
आप यहां से bal tatha gati ke niyam notes download कर सकते हैं। इस अध्याय मे हम बल एवं गति, न्यूटन के गति के नियम, क्रिया और प्रतिक्रिया बल, वस्तु का जड़त्व, जड़त्व और द्रव्यमान, संवेग, बल एवं त्वरण आदि के बारे में विस्तार से पड़ेगे।
बल :-
किसी वस्तु को गति की अवस्था में लाने, उसकी गति को रोकने या उसकी दिशा बदलने के लिए हमें उसे खींचना, धकेलना या ठोकर लगाना पड़ता है। खींचने, धकेलने या ठोकर लगाने की इसी क्रिया को बल कहते है।
🔸 सरल शब्दों में: वह बाह्य कारक जो किसी वस्तु की स्थिति या आकार में परिवर्तन करता है या परिवर्तन करने का प्रयत्न करता है, बल कहलाता है।
🔸 बल का SI मात्रक :- बल का SI मात्रक kgms-² है। इसे न्यूटन के नाम से भी जाना जाता है तथा प्रतीक N द्वारा व्यक्त किया जाता है। 1 न्यूटन का बल किसी 1 kg द्रव्यमान की वस्तु में 1 ms-² का त्वरण उत्पन्न करता है।
बल का प्रभाव :-
बल लगाने से वस्तु पर निम्न प्रभाव हो सकते हैं:
वस्तु के वेग में परिवर्तन करना: बल के प्रयोग से किसी वस्तु की गति को तेज़ या धीमी किया जा सकता है। जैसे — जब हम साइकिल चलाते हैं और पैडल पर बल लगाते हैं तो उसकी गति बढ़ जाती है, और ब्रेक लगाने पर बल विपरीत दिशा में लगता है और साइकिल की गति धीमी हो जाती है।
वस्तु की गति की दिशा बदलना: बल वस्तु की गति की दिशा बदल सकता है। जैसे — गेंद को बल्ले से तिरछा मारने पर उसकी दिशा बदल जाती है।
वस्तु का आकार या आकृति बदलना: बल के प्रयोग से वस्तु का रूप या आकृति बदली जा सकती है।जैसे — रबर या मिट्टी को दबाने पर उसका आकार बदल जाता है।
बल के प्रकार :-
बल दो प्रकार के होते हैं-
- 1. संतुलित बल
- 2. असंतुलित बल
1. संतुलित बल :-
जब किसी वस्तु पर लगाए गए कुछ बलों का परिणामी बल शून्य हो जाता है, तो वे बल संतुलित बल कहलाते हैं।
🔸 सरल शब्दों में: जब दो या अधिक बल किसी वस्तु पर विपरीत दिशाओं में समान परिमाण से कार्य करते हैं, तो वस्तु की गति में कोई परिवर्तन नहीं होता। ऐसी स्थिति में वस्तु स्थिर रहती है या समान वेग से चलती रहती है।
- उदाहरण: दो व्यक्तियों द्वारा एक रस्सी को समान बल से खींचना:
- यदि दो व्यक्ति रस्सी के दोनों सिरों से बराबर बल से विपरीत दिशाओं में खींचते हैं, तो रस्सी स्थिर रहती है और कहीं नहीं खिसकती। इसका मतलब परिणामी बल शून्य होगा और दोनों टीमें अपने स्थान पर स्थिर बने रहते हैं। इस दशा में दोनों टीमों द्वारा रस्सी पर लगाया गया बल संतुलित बल है।
संतुलित बल के प्रभाव :-
- सन्तुलित बल वस्तु की गति की अवस्था में कोई परिवर्तन नहीं लाते हैं।
- अगर वस्तु विरामावस्था में है, तो वह विरामावस्था में ही रहेगी।
- अगर वस्तु एकसमान गति से चल रही है, तो वह उसी गति से सीधी रेखा में चलती रहेगी।
- सन्तुलित बल वस्तु की आकृति में हल्का परिवर्तन कर सकते हैं। जैसे — रबर की गेंद या स्प्रिंग को दोनों ओर से समान बल से दबाने पर उसका आकार थोड़ा बदल जाता है।
2. असंतुलित बल :-
जब किसी वस्तु पर लगाए गए कुछ बलों का परिणामी बल शून्य न हो तो बल असंतुलित बल कहलाते हैं।
🔸 सरल शब्दों में: जब किसी वस्तु पर विपरीत दिशाओं में असमान परिमाण के बल लगाए जाते हैं, तो वस्तु अधिक बल वाली दिशा में गति करने लगती है। यह असंतुलित बल के कारण होता हैं।
- उदाहरण: क्रिकेट की गेंद को कैच लेना:
- जब एक फील्डर अपने हाथों से आती हुई गेंद को पकड़ता है, तो वह गेंद पर एक बल लगाता है जो गेंद की गति के विपरीत दिशा में होता है। यह एक असन्तुलित बल है जो गेंद की गति को धीमा करके उसे रोक देता है।
असंतुलित बल के प्रभाव :-
- वस्तु की चाल में परिवर्तन कर सकते हैं।
- वस्तु की गति को बढ़ा या घटा सकता है।
- वस्तु की गति की दिशा बदल सकता है।
- वस्तु को विराम अवस्था से गति में या गति से विराम में ला सकता है।
घर्षण बल :-
घर्षण बल एक प्रतिरोधक बल है जो दो सतहों के बीच संपर्क में आने पर उत्पन्न होता है। घर्षण बल संपर्क में आने वाली सतहों के बीच कार्य करता है और गति की दिशा के विपरीत होता है।
- उदाहरण: बच्चे जब किसी बक्से को खुरदरे फर्श पर धकेलने की कोशिश करते हैं, तो
- शुरुआत में जब बक्से को कम बल से धकेला जाता है, तो घर्षण बल उसे संतुलित कर देता है और बक्सा नहीं खिसकता।
- जब धकेलने का बल, घर्षण बल से अधिक हो जाता है, तो एक असंतुलित बल उत्पन्न होता है और बक्सा खिसकने लगता है।
🔸 घर्षण का प्रभाव :- वास्तविक जीवन में वस्तुएँ कुछ दूरी तय करने के बाद रुक जाती हैं, क्योंकि उन पर घर्षण बल कार्य करता है। घर्षण बल हमेशा वस्तु की गति की विपरीत दिशा में कार्य करता है।
संतुलित तथा असंतुलित बलों में अंतर :-
| संतुलित बल | असंतुलित बल |
|---|---|
| जब किसी वस्तु पर कार्यरत सभी बलों का परिणामी बल शून्य (0) होता है, तो वे संतुलित बल कहलाते हैं। | जब किसी वस्तु पर कार्यरत सभी बलों का परिणामी बल शून्य नहीं होता है, तो वे असंतुलित बल कहलाते हैं। |
| ये बल वस्तु की स्थिति में परिवर्तन नहीं करते। अर्थात् विरामावस्था में स्थित वस्तु को गतिशील नहीं कर सकते। | ये बल विरामावस्था में स्थित वस्तु को गतिमान कर सकते हैं। |
| ये बल वस्तु की आकृति या आकार में परिवर्तन कर सकते हैं। | ये बल सामान्यतः वस्तु की आकृति या आकार में परिवर्तन नहीं करते। |
| ये बल गतिशील वस्तु की चाल या दिशा में परिवर्तन नहीं करते। | ये बल वस्तु की चाल या दिशा में परिवर्तन कर सकते हैं। |
| परिणामस्वरूप वस्तु की गति की अवस्था समान रहती है। | परिणामस्वरूप वस्तु की गति की अवस्था बदल जाती है। |
न्यूटन के गति के नियम :-
किसी वस्तु की गति का वर्णन और गति में परिवर्तन के कारणों को समझने के लिए न्यूटन ने गत्ति के तीन नियम निर्धारित किए। इन तीन नियमों को न्यूटन के गति के नियम कहते हैं।
प्रथम नियम :- यदि कोई वस्तु स्थिर है अथवा एक समान चाल से गति कर रही है तो वह तब तक स्थिर या उसी सरल रेखा में गति करती रहेगी, जब तक कि उस पर कोई बाह्य बल न लगाया जाए। इसे जड़त्व का नियम भी कहा जाता है।
द्वितीय नियम :- किसी वस्तु के संवेग परिवर्तन की दर वस्तु पर आरोपित असंतुलित बल के समानुपाती एवं बल की दिशा में होती है।
तृतीय नियम :- जब दो वस्तुएँ आपस में अन्योन्य क्रिया करती हैं तो प्रत्येक क्रिया के बराबर और विपरीत प्रतिक्रिया होती है।
न्यूटन की गति का प्रथम नियम :-
गति के प्रथम नियम के अनुसार, प्रत्येक वस्तु अपनी स्थिर अवस्था या सरल रेखा में एकसमान गति की अवस्था में बनी रहती है जब तक कि उस पर कोई बाहरी बल कार्यरत न हो। यह नियम गैलीलियो के विचारों पर आधारित है। यह जड़त्व की अवधारणा को परिभाषित करता है।
- दूसरे शब्दों में, इस नियम के अनुसार ”
- यदि कोई वस्तु विरामावस्था में है, तो वह तब तक विरामावस्था में बनी रहती है जब तक कि उस पर कोई बाह्य बल कार्य न करे।
- यदि कोई वस्तु गतिशील है, तो वह तब तक गतिशील बनी रहती है जब तक कि उस पर कोई बाह्य बल कार्य न करे।
सभी वस्तुएँ अपनी गति की अवस्था में परिवर्तन का विरोध करती हैं। किसी भी अवस्था में परिवर्तन सिर्फ बाह्य बल से ही हो सकता है।
उदाहरण :- यदि कोई वस्तु जैसे- पुस्तक मेज पर रखी है तो वह तब तक उसी अवस्था में बनी रहेगी। जब तक कि उस पर कोई बाह्य बल न लगाया जाए।
जड़त्व का नियम :-
गुणात्मक रूप में किसी वस्तु के विरामावस्था में रहने या समान वेग से गतिशील रहने की प्रवृत्ति को जड़त्व कहते हैं। यही कारण है कि गति के पहले नियम को जड़त्व का नियम भी कहते हैं। किसी वस्तु का जड़त्व उसके द्रव्यमान से मापा जाता है।
संवेग :-
किसी वस्तु के द्रव्यमान व वेग के गुणनफल को संवेग कहते है। इसे p से प्रदर्शित करते है।
- यदि वस्तु के द्रव्यमान को m से व वस्तु के वेग को v से प्रकट करें तो वस्तु का संवेग P का परिमाण,
- सूत्र: p = m×v
- SI मात्रक: संवेग का S.I मात्रक किलोग्राम मीटर प्रति सेकण्ड है। यह एक सदिश राशि है।
- दिशा: संवेग में परिमाण और दिशा दोनों होते हैं। इसकी दिशा वही होती है, जो वेग की होती है।
संवेग और बल का संबंध :-
बल वस्तु के वेग को बदलता है, और चूंकि संवेग वेग पर निर्भर करता है, इसलिए बल संवेग को भी बदलता है।
🔸 सरल शब्दों में: किसी असंतुलित बल के प्रयोग से उस वस्तु के वेग में परिर्वतन होता है, इसलिए यह कहा जा सकता है कि बल ही संवेग को भी परिवर्तित करता है।
संवेग परिवर्तन केवल बल के परिमाण पर ही नहीं, बल्कि उस समय पर भी निर्भर करता है, वस्तु के संवेग में परिवर्तन लाने के लिए लगने वाला बल और उसका लगने का समय दोनों महत्वपूर्ण हैं।
उदाहरण: कार को एक झटके में धक्का (कम समय) देने से कार नहीं चलती। इसके बजाय लगातार धक्का देने (अधिक समय) से संवेग में अधिक परिवर्तन होता है और कार चालू हो जाती है।
न्यूटन की गति का द्वितीय नियम :-
गति का द्वितीय नियम यह बताता है कि किसी वस्तु के संवेग में परिवर्तन की दर उस पर लगने वाले असंतुलित बल की दिशा में बल के समानुपातिक होती है।
न्यूटन का गति का दूसरा नियम है: F = m×a
- विवरण:
- F = बल
- m = वस्तु का द्रव्यमान
- a = त्वरण
न्यूटन की गति का तृतीय नियम :-
“हर क्रिया के लिए, उसके समान और उसके विपरीत दिशा में प्रतिक्रिया होती है।”
गति के तीसरे नियम के अनुसार, जब एक वस्तु दूसरी वस्तु पर बल लगाती है तब दूसरी वस्तु द्वारा भी पहली वस्तु पर तात्क्षणिक बल लगाया जाता है। ये दोनों बल सदैव क्रिया और प्रतिक्रिया के रूप में होते हैं।
- क्रिया और प्रतिक्रिया बल:
- ये बल सदैव युगल में कार्य करते हैं।
- क्रिया और प्रतिक्रिया बल कभी भी एक ही वस्तु पर कार्य नहीं करते। वे हमेशा दो भिन्न वस्तुओं पर लगते हैं।
- ये दोनों बल परिमाण में सदैव समान लेकिन दिशा में विपरीत होते हैं।
तृतीय नियम का उदाहरण :-
- सड़क पर चलना :-
- क्रिया: जब आप चलना शुरू करते हैं, तो आपके पैर सड़क को पीछे की ओर धकेलते हैं।
- प्रतिक्रिया: सड़क आपके पैरों पर उतना ही बल विपरीत दिशा में लगाती है, जिसके कारण आप आगे बढ़ते हैं।
- परिणाम: यही प्रतिक्रिया बल आपको आगे बढ़ने में मदद करता है।
- यह बल पेशीय बल के माध्यम से उत्पन्न होता है।
